जैसा मिस्र देखा
भारत की तरह ही मिस्र को भी भरपूर कुदरती वरदान मिले हैं। कहीं अथाह जल राशि वाला समुद्र है तो कहीं कई हजार किलोमीटर में फैला रे गिस्तान। कहीं पानी से लबालब नील नदी है तो कहीं पानी के लिए तरसते कबीलों की भी कमी नहीं है। एक तरफ लाल सागर से सटा शर्म-अल-शेख है तो दूसरी तरफ नील नदी के किनारे बसा इजिप्ट का सबसे आघुनिक शहर काइरो है। एक से एक बेहतरीन कारों की कतारें, शानदार सब-वे और आसमान छूती इमारतें हैं। यानी, कहीं मुंबई और दिल् ली है तो कहीं रेत से पटा जैसलमेर का रेगिस्तान। यहां का सागर कहने भर को लाल सागर है।
इसका पानी इतना साफ है कि आप नंगी आखों से ही कई मीटर गहराई तक साफ देख सकते हैं। इतने साफ पानी के सागर में तब आंखें और चौंधिया जाती हैं जब रंग- बिरंगी मछलियों का झुंड आपकी आखों के सामने आता और क्षण भर में ओझल हो जाता है। कोरल से बने पक्के किनारे और उसके आसपास ही जैव विविधता से भरा समुद्र आपको एक नई दुनिया में ले जाता है।
कुदरत के इस तिलिस्म को दिखाने के लिए यहां के पर्यटन कारोबारियों ने सब मैराइन बोट्स ( पनडुब्बियों) का इंतजाम भी किया है। यह थोड़ा महंगा तो है, पर इसकी यात्रा के बाद आप खुद को ठगा हुआ महसूस नहीं करेंगे। एक से डेढ़ घंटे की यात्रा में जो कुछ आप देखेंगे, उसे शायद ही कभी भूल पाएं।
पिरामिड और मनीज का देश
इजिप्ट का नाम जुबां पर आते ही सदियों पुराने गीजा के पिरामिड की तस्वीर सामने आती है। 108 मीटर तक ऊंचे पिरामिड तेज हवाओं के थपेड़ों के बावजूद आज भी शिल्प कौशल के उन नमूनों का मुंह चिढ़ाते हैं, जो इनके बाद ही बनाए गए। जिस समय पत्थर काटने के तरीके तक ढंग से दुनिया को नहीं पता थे, तब बड़े-बड़े पत्थर काटकर इन पिरामिडों को आकार दिया गया था। पीले रंग के पत्थर गीजा से कई किलोमीटर दूर से लाए जाते थे और फिर उन्हें एक के ऊपर एक रखकर इन पिरामिडों को आकार दिया गया। कई पिरामिड पीले रंग के अलबस्तर पत्थर के बने हैं। आज इसी पत्थर के टाइल्स से इजिप्ट की खास इमारतों को सजाया जा रहा है।
इन पिरामिडों से देश के लोगों को इतना लगाव है कि पीले पिरामिडों से समानता के लिए शहर के 90 फीसदी से ज्यादा बड़े भवन पीले ही रंग से रंगे नजर आते हैं। इस देश को एक और पहचान वर्षो से रखे मानव शवों से भी मिली है। खास रासायनिक लेप की वजह से राजवंश के उन लोगों के शरीर आज भी देखे जा सकते हैं जो सदियों पहले दुनिया छोड़ गए। इन सुरक्षित शवों को ही मनी कहा जाता है। इन्हें देखने के लिए काइरो का म्यूजियम बेहतर स्थान है।