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भारत के पहले फैशन डिजायनर थे महात्मा गांधी

मुंबई.जी हां, यह सुनने में थोड़ा अजीब सा जरूर लगेगा कि जिस व्यक्ति ने कम से कम कपड़े पहनकर अपना जीवन गुजार दिया वह भारत का पहला फैशन डिजायनर कैसे हो सकता है। लेकिन भारत की पहली महिला फैशन डिजायनर रितुकुमार का कहना है कि महात्मा गांधी भारत के पहले फैशन डिजायनर थे और पूरा देश एक रैंप था। गांधी जी ने खादी के कपड़े को जन-जन में लोकप्रिय बनाया।

ऐसा कहा जाता है कि महात्मा गांधी जब एक गांव में पहुंचे और वहां एक छोटी सी झोपड़ी में रहने वाली एक महिला से पूछा कि उसे किसी चीज की जरूरत है, तो उस महिला अपने अंधेरे से घिरी झोपड़ी के एक कोने में रखे चरखे की ओर इशारा किया और कहा कि उसके पास तो सबकुछ है।

इस घटना को बीते साठ दशक से अधिक का वक्त गुजर चुका है और इस दौरान चरखे और खादी ने एक लंबा सफर तय किया है। खादी अब भारतीय ही नहीं बल्कि विश्व फैशन में अपना स्थान बनाने में कामयाब हो गई है। वस्त्र डिजायनरॊ ने इसे सहजता से स्वीकार किया और एक नया ट्रेंड फैशन डिजायन के क्षेत्र में चल पड़ा।

भारत की पहली महिला वस्त्र डिजायनर रितु कुमार का कहना है कि खादी अंतर्राष्ट्रीय फैशन बाजार में काफी लोकप्रिय और इसकी मांग भी अधिक है। उन्होंने कहा खादी अब काफी फैशनेबल हो गई है। रितु का कहना है कि खादी भारतीयता का प्रतीक है और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भी इसके प्रति लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है। उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि बॉलीवुड ने इस कपड़े को अपनाने में उत्साह नहीं दिखाया। इसके बावजूद उच्च फैशन स्तर के मानकों को पार कर पाने में खादी सफल रही।

दिल्ली में आयोजित फैशन वीक में भी डिजायनरों ने खादी के प्रति काफी उत्सुकता दिखाई थी। इसके बाद इटली के फैशन वीक में भी खादी ने अपना जलवा बरकरार रखा। रितु ने कहा कि साठ साल पहले खादी आम आदमी के शरीर पर स्वतंत्रता के प्रतीक के रूप में शोभती थी आज यह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फैशन को नई पहचान दे रही है।





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