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कपारो समूह भी लाएगी भारत में छोटी कार

नई दिल्ली. लॉर्ड स्वराज पॉल का कपारो समूह भी भारत में छोटी कार लाने की तैयारी में है।

कपारो एक सिटी कार का विकास कर रही है जिसका उत्पादन देश की अन्य कार कंपनियां फ्रेंचाइजी के रूप में कर सकेंगीं। कपारो समूह के संस्थापक और चेयरमैन लॉर्ड स्वराज पॉल ने फिक्की द्वारा आयोजित एक समारोह के अवसर पर यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि, हम एक दो साल की परियोजना पर काम कर रहे हैं और इस परियोजना के द्वारा बनने वाली सिटी कार कम्पोजिट मटीरियल से बनेगी और ज्यादा प्रभावी होगी।

लार्ड पॉल ने बताया कि कपारो इस छोटी कार का सिर्फ डिजाइन तैयार करेगी और इसका उत्पादन स्वयं नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि हम इस कार का उत्पादन इसलिए नहीं कर रहे हैं क्योंकि फिलहाल हमारे सभी ग्राहक कार निर्माता हैं। हम इसके उत्पादन के लिए अन्य ऑटो कंपनियों को फ्रेंचाइजी देंगे। कंपनी उस दल के साथ कार्य कर रही है जिसने हल्की कपारो टी१ रेसिंग कार तैयार किया है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित सिटी कार के डिजाइनिंग का अधिकांश हिस्सा कंपनी के चेन्नई संयंत्र में तैयार किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि कपारो का लक्ष्य कार निर्माताओं के लिए नई पीढ़ी की ईंधन की दृष्टि से किफायती और हल्की पारिवारिक कार तैयार करना है जिसमें कार्बन डाइ आक्साइड का भी उत्सर्जन बहुत कम हो। पॉल ने बताया कि कपारो टी1 रेसिंग कार अगले वर्ष दिल्ली के ऑटो एक्स्पो में प्रदर्शित किया जाएगा। कपारो टी1 एक उच्च क्षमता की दो सीट वाली स्पोर्ट्स कार है जिसका डिजाइन और प्रदर्शन फॉमरूला वन रेसर कार जैसा ही है। प्रति टन 1045 बीएचपी की ताकत देने वाली यह कार काफी हल्की, सिर्फ 550 किलोग्राम की है और इसका चेसिस अत्याधुनिक कम्पोजिट पदार्थो से बना हुआ है।

गरीबी के रहते ऊंची विकास दर की बात बेमानी
इसके पहले फिक्की में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान लोगों को संबोधित करते हुए लॉर्ड स्वराज पाल ने कहा कि गरीबी रेखा से नीचे रहने वाली ३५ प्रतिशत जनता तक जब तक विकास की किरण नहीं पहुंचती, ऊंची विकास दर की बात बेमानी है। उन्होंने कहा कि भारत बदल रहा है लेकिन गरीबी दूर करने के लिए गंभीर प्रयासों की कमी है।

शिक्षा में बिषमता की चर्चा करते हुए लार्ड पॉल ने कहा कि भारत में सिर्फ 7 फीसदी लोग उच्च शिक्षा प्राप्त कर पाते हैं, जबकि ब्रिटेन और जी-8 देशों में यह आंकड़ा क्रमश: 50 और 47 फीसदी का है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के बिना उत्पादकता में बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं की जा सकती।

पॉल ने कहा कि वाल-मार्ट जैसे बड़े रिटेल चेन से डरने की जरूरत नहीं है। वास्तविकता यह है कि यदि छोटे दुकानदारों को भी उसी स्तर की सुविधाएं प्रदान की जाएं तो वे भी आसानी से इस तरह के बड़े चेन का मुकाबला कर सकते हैं।





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