मुंबई. जैन इरीगेशन पानी की एक नई अवधारणा पर काम कर रही है: वाटर ऑन डिमांड यानी मांग पर पानी ।
किसान या उपभोक्ता मीटर वाले नल से जरूरत के मुताबिक पानी निकाल सकते हैं और इस्तेमाल के हिसाब से भुगतान कर सकते हैं। कंपनी के अनिल जैन का कहना है कि कंपनी आखिर पानी के वितरण, जल संरक्षण और वाटर ट्रीटमेंट के व्यवसाय में ही है।
दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी ड्रिप इरीगेशन कंपनी होने के नाते स्वाभाविक रूप से वह अपना दायरा बढ़ाना चाहती है। कुलमिलाकर कंपनी पानी के व्यवसाय पर ध्यान केंद्रित कर रही है। मांग पर पानी की परियोजना भी देश के दक्षिणी और पश्चिमी राज्यों में ग्रामीण इलाकों में परीक्षण के दौर में है। जैन की राय में विदेश में तो पानी एक बड़ा व्यवसाय है। क्रेडिट स्विस की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 तक 18 देशों में पानी की मांग आपूर्ति से ज्यादा हो जाएगी और 58 देशों (जिनमें दुनिया की 64 फीसदी आबादी होगी।) पानी की समस्या से जूझ रहे होंगे।
क्या है वाटर ऑन डिमांड
इसका मतलब है कि किसान को जितना पानी चाहिए, उतना उसे मिले। जब भी किसान को जरूरत हो, प्रेशराइज्ड पंपों के जरिए पानी उपलब्ध कराया जाए। वाल्व खोलकर किसान पानी ले सकता है और उसका उतना ही भुगतान उसे करना होगा। अब ऐसे क्षेत्र की तलाश करनी होगी, जहां किसान पानी का भुगतान करने को तैयार हो। मांग पर पानी मुहैया कराना जैन इरीगेशन की एक बड़ी योजना का हिस्सा है।
कंपनी पानी वितरण के व्यवसाय में बड़े पैमाने पर उतरना चाहती है। जैन के अनुसार अवसर काफी ज्यादा हैं। जलगांव की इस कंपनी ने फ्रेंच वाटर कंपनी वियोलिया से अनुबंध किया है।
उसके एचडीपीई पाइप के जरिए लोगों को चौबीसों घंटे पानी उपलब्ध कराया जा सकता है। क्रेडिट स्विस रिपोर्ट के अनुसार जनरल इलेक्ट्रिक ने घोषणा की है कि उसकी पानी की जरूरत 35 फीसदी (2009 तक) की साझा दर से बढ़ने वाली है। डो केमिकल ने भी पानी की जरूरत तीन गुनी होने की उम्मीद जताई है।