भोपाल. नवरात्र में मां दुर्गा की स्थापना के लिए पूजन सामग्री, श्रंगार के आभूषण, नए वस्त्र आदि की खरीदी जब श्राद्ध पक्ष में हो सकती है, तो फिर ये दिन
वस्तुओं के क्रय-विक्रय के लिए कैसे अशुभ हो सकते हैं? देवउठनी ग्यारस से पहले देवों के सोने के दिनों में ब्याह की तमाम वस्तुएं खरीदना भी वर्जित नहीं है। यह कहना है शहर के अनेक विद्वान पंडितों का। उनका कहना है कि बुधवार को महालक्ष्मी पूजा और शुक्रवार को पुष्य नक्षत्र का दिन सोना व अन्य वस्तुओं की खरीदी के लिए गोल्डन अवसर की तरह है।
श्राद्ध पक्ष में शुभ कार्य और नई वस्तुओं का क्रय न करने की आम धारणा कहां और कब से शुरू हुई, इसके बारे में निश्चित रूप से कुछ ज्ञात नहीं है, पर जब से लोगों को मालूम हुआ है कि शास्त्रों व पुराणों आदि में इस तरह का कोई उल्लेख नहीं है, वे बाजार का रुख करने लगे हैं।
ज्योतिषियों की राय
पं. भंवर लाल शर्मा कहते हैं कि माना जाता है कि श्राद्ध पक्ष में पितृ पृथ्वी पर आते हैं। सवाल यह है कि वे कौन से पितृ होंगे, जो अपने परिवार में शुभ कार्य होते देख नाराज होंगे। ऐसा भी नहीं हो सकता कि वे अपने परिजनों को परिवार की सुख-समृद्धि से जुड़ी वस्तुओं को बाजार से घर लाते देख खुश न हों।
पं. शर्मा का कहना है कि इतना जरूर है कि इन दिनों में विवाह जैसा शुभ कार्य नहीं किया जाता। वह इसलिए भी कि हमारा ध्यान पुरखों की ओर से न बंटे और तर्पण आदि में कोई रुकावट न आए। चंद्र, गुरु व शुक्र आदि ग्रहों की अनुकूलता देखे बगैर विवाह नहीं किया जाता।
पं. प्रहलाद पंड्या का कहना है कि अष्टमी तिथि वैसे भी क्रय-विक्रय व शुभ कार्ये के लिए शुभ मानी जाती है। पितृ पक्ष में अष्टमी पर जब धन व वैभव की देवी महालक्ष्मी की पूजा वर्जित नहीं है, तो अन्य शुभ कार्य या वस्तुओं की खरीदी कैसे अशुभ हो सकती है। बुधवार को अष्टमी और शुक्रवार को पुष्य नक्षत्र में स्वर्ण, वस्त्र या अन्य सामान की खरीद-फरोख्त वर्जित नहीं माना जा सकता।
पं. पंड्या का कहना है कि महाभारत काल में पांडवों ने इन्हीं दिनों की अष्टमी पर मिट्टी का हाथी और मिट्टी की लक्ष्मी प्रतिमा बना कर पूजा की और कौरवों पर विजय प्राप्त की और राज-पाट वापस मिला। यह पितृ पक्ष में महालक्ष्मी पूजा का ही फल था।
* अष्टमी तिथि और पुष्य नक्षत्र पर बाजारों में सोना और अन्य सामग्री की बिक्री में उठाव आने की संभावना है। क्योंकि पुष्य नक्षत्र को पितृ पक्ष में शुभ ही माना जाता है।
अनुपम अग्रवाल, प्रवक्ता व्यापारी महासंघ
* भले ही श्राद्ध पक्ष वाले दिन हों, पर पुष्य नक्षत्र का शुभ अवसर लोग हाथ से नहीं जाने देते। इस दिन स्वर्ण आभूषण की खरीदी के लिए ज्वेलरों की दुकानों पर खासी भीड़ उमड़ती है।
-नवनीत अग्रवाल, सराफा व्यवसायी
* महालक्ष्मी पूजा के दिन और पुष्य नक्षत्र में सोना व चांदी के जेवरों की करीदी में हर साल इजाफा ही होता रहा है।
-आनंद जैन अन्नू, व्यवसायी
* श्राद्ध पक्ष में कई लोग दान करने भगवान की प्रतिमाएं खरीदते हैं।
-मदन लाल सोनी, व्यवसायी