भोपाल. प्रदेश में हर साल सेवानिवृत्त होने वाले 15 से 18 हजार लोगों को पेंशन बेचना घाटे का सौदा साबित हो रहा है। सरकार द्वारा रिटायर्ड होने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों की पेंशन बेचे जाने (सारांशीकरण) की राशि घटाकर आधी कर देने से हर कर्मचारी को एक से लेकर डेढ़ लाख रुपए तक का घाटा उठाना पड़ रहा है। सभी कर्मचारियों को पेंशन बेचे जाने पर कम रुपए मिलने से यह आंकड़ा प्रतिवर्ष 150 करोड़ रुपए से ऊपर पहुंच रहा है। जबकि इस राशि के भुगतान न करने से सरकारी खजाने में शुद्ध बचत हो रही है। इसके खिलाफ हाल में एक मामला हाईकोर्ट में पहुंचा है, जिसमें सुनवाई होनी है।
मूल पेंशन इकट्ठा होने में भी देरी: कम्यूटेशन राशि कम किए जाने के पहले व्यक्ति को 58 साल में रिटायरमेंट होने पर उसकी आयु 70 साल होने पर उसे मूल पेंशन (रिस्टोर) होकर मिलने लगती थी। नई व्यवस्था से 75 वर्ष की आयु पूरी होने पर ही व्यक्ति की पेंशन रिस्टोर हो पाती है। इससे अधिकारी कर्मचारियों को घाटा होता है। अब वे व्यक्ति ही पेंशन बेचना उचित समझते हैं, जो ज्यादा बीमार हैं।
केंद्रीय कर्मचारियों के अलग हैं नियम: राज्य सरकार और केंद्रीय कर्मचारियों के सेवानिवृत्ति के बाद कम्यूटेशन के नियम अलग-अलग हैं। केंद्र सरकार की सेवाओं में कार्यरत अधिकारी, कर्मचारी को पेंशन बेचने में अब भी एक रुपए के बदले 120 रुपए मिलते हैं। इससे केंद्र में कर्मचारी को रिटायरमेंट होने पर कम्युटेशन के 2.50 लाख रुपए और अधिकारी को 3.50 लाख रुपए मिलते हैं। जबकि राज्य के अधिकारी को ज्यादा से ज्यादा 75 हजार रुपए और अधिकारी को 1.50 लाख रुपए ही मिल पाते हैं।
अन्य राज्यों में भी घटाई गई थी कम्यूटेशन की राशि: तमिलनाडु में भी कम्यूटेशन की राशि घटाई गई थी, जिसके खिलाफ वहां हाईकोर्ट में मामला गया था। जहां कम्यूटेशन की राशि के घटाए जाने को कोर्ट ने उचित माना था। हाईकोर्ट के इस फैसले को वहां के अधिकारियों कर्मचारियों ने सुप्रीमकोर्ट में 27 अप्रैल 2004 को चुनौती दी, जहां प्रकरण क्रमांक 3648-3651/2004 की सुनवाई हुई। इस मामले में कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को कम्यूटेशन राशि पूर्ववत 1 रुपए के 120 रुपए रखे जाने के आदेश दिए। फिलहाल मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में ही कम्यूटेशन घटाया गया है, अन्य राज्यों में अब भी केंद्रीय दर के अनुसार कम्यूटेशन राशि मिल रही है।
* कम्यूटेशन से संबंधित मामले का अध्ययन कराया जाएगा। इसके बाद सरकार विचार करेगी।
—राघवजी, वित्त मंत्री
क्या है समस्या
सारांशीकरण (कम्यूटेशन) पेंशन बेचे जाने के एवज में 18 फरवरी 2000 के पहले तक 1 रुपए के बदले 120 रुपए मिलते थे, जो अब घटाकर 1 रुपए के बदले मात्र 52 रुपए कर दिए गए है। इससे कर्मचारियों को मूल पेंशन में से 30 प्रतिशत राशि बेचे जाने पर एक से डेढ़ लाख रुपए तक का घाटा होता है। कम्यूटेशन राशि घटाए जाने की वजह उस समय वित्तीय स्थिति ठीक न होना बताई जा रही है।