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दिनदहाड़े अपहरण के बाद छात्र को छोड़ा

अजमेर. श्रीनगर रोड पर राजा साइकिल चौराहे के निकट मंगलवार को वैन में सवार चार युवक बारह वर्षीय स्कूली छात्र को दिनदहाड़े अगवा कर ले गए। अपहर्ताओं gauravने छात्र के पिता को फोन कर पुलिस को खबर करने पर बेटे को जान से मारने की धमकी भी दी। पुलिस अपहर्ताओं की तलाश में जुटी थी कि देररात छात्र आदर्शनगर इलाके में मिल गया।

पुलिस के अनुसार श्रीनगर रोड निवासी किराना और आयुर्वेद औषधियों के विक्रेता प्रहलाद गुप्ता का पुत्र धीरज गुप्ता (12) सेंट एंसलम्स स्कूल में सातवीं कक्षा में पढ़ता है। मंगलवार दोपहर करीब ढाई बजे वह अपने साथी कृष्ण केशवदास के साथ श्रीनगर रोड पर जोधपुर हाउस में ट्यूशन क्लास अटेंड करने गया था। वह कृष्ण केशवदास की साइकिल पर था। राजा साइकिल चौराहे पर मारुति वैन में सवार कुछ युवकों ने उन्हें रोका। पता बताने के बहाने वैन ड्राइवर ने धीरज को वैन में बिठा लिया। कृष्ण केशव ने लौटकर धीरज के परिवार को जानकारी दी।

प्रहलाद गुप्ता के मुताबिक पहले तो वे सोचकर धीरज का इंतजार करते रहे कि कोई परिचित उसे साथ ले गया होगा, लेकिन करीब आधे घंटे बाद उसके मोबाइल पर अज्ञात व्यक्ति ने धमकी दी कि ‘बनिये, तुम्हारा बेटा हमारे कब्जे में है। पुलिस कार्रवाई या उसे तलाशने के लिए इधर-उधर हाथ-पैर मारे तो अंजाम बुरा होगा।’

गुप्ता की रिपोर्ट पर अपहरण का मामला दर्ज कर पुलिस अपहर्ताओं की तलाश कर ही रही थी कि देररात को धीरज ने अपने घर पर फोन कर बताया, वह आदर्शनगर इलाके में है। पुलिस ने मौेके पर पहुंचकर घबराई हालत में मिले छात्र को उसके घर पहुंचाया। देररात तक पुलिस उससे वारदात के बारे में पूछताछ करती रही।

आंख पर पट्टी बांध कर ले गए
वारदात के शिकार छात्र धीरज ने पुलिस को बताया कि अपहर्ताओं ने वैन में बिठाने के बाद उसकी आंखों पर पट्टी बांध दी थी। उसे काफी देर तक घुमाने के बाद चार कमरों के एक मकान में ले जाया गया, जहां एक महिला और दो बच्चियां थी। दूसरे कमरों में कॉलेज के छात्र थे। अपहर्ता एक दूसरे से बातचीत में जो नाम संबोधित कर रहे थे उनमें राहुल, रमेश और वैन ड्राइवर का नाम अनिल था। इनमें से एक युवक खुद को डीएवी कॉलेज में फस्र्ट इयर का स्टूडेंट बता रहा था। मकान में उसकी आंखों से पट्टी हटा दी गई थी।

धीरज के बयानों के मुताबिक अपहर्ताओं ने काफी देर बाद उसे एक्टिवा बाइक पर बैठा कर एसटीडी बूथ के निकट छोड़ दिया गया। छोड़ने वाले युवकों में से एक ने उसे दस रुपए दिए और कहा कि पापा से फोन पर बातचीत कर लेना। उसने बूथ से पापा के मोबाइल पर फोन किया। चाचा आशुतोष ने फोन रिसीव किया था। उसने विज्ञान नगर में होने की सूचना दी थी।

बयानों पर भरोसा नहीं
थाना प्रभारी आस मोहम्मद ने बताया कि धीरज के बयान विरोधाभासी हैं। वह कभी वैन में सवार युवकों में से दो को पहचानने की बात कहता है, तो कभी उन्हें अपरिचित बताता है। धीरज के बयानों के आधार पर माना जा रहा है कि वारदात में उसके परिजनों का कोई परिचित शामिल है। धीरज के परिजनों और रिश्तेदारों के बारे में भी तफ्तीश की जाएगी। फिलहाल धीरज के बयानों की तस्दीक की जा रही है। फिलहाल उसकी मानसिक हालत सामान्य नहीं है। बुधवार को दुबारा उससे पूछताछ होगी और उसे घटना स्थल की तस्दीक के लिए भी ले जाया जाएगा।

नकाबपोश और बुर्का
धीरज ने पुलिस को बताया कि उसे जिस मकान में ले जाया गया था, उसके कमरे में पिंक कलर का पेंट था। दीवार पर एक बुर्का टंगा हुआ था। महिला और उसकी बच्चियों ने सलवार सूट पहन रखे थे। वहां एक नंगे बदन युवक आया था, जिसकी पीठ पर सफेद दाग के निशान थे। एक अन्य युवक ने आधा चेहरा कपड़ा बांध कर छिपाया हुआ था। घीरज का कहना है कि नकाबपोश की आवाज जानी पहचानी थी। वह खुद को उसका जीजा बता रहा था।





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