जोधुपर. ‘ऊर्जा बचत’ की बातें तो बड़ी-बड़ी होती हैं, हकीकत में न तो बचत के उपाय मुकम्मल हो पाते हैं और ना ही सुधार की प्रक्रिया कागजों से बाहर आ
पाती है। ऊर्जा संरक्षण अधिनियम-2001 के तहत मई में अधिसूचित ऊर्जा बचत के प्रावधानों को लागू करने के हाल देखकर तो यही लगता है कि शहरी निकायों ने इसे सिरे से ही भुला दिया है।
ऊर्जा विभाग ने 25 मई 2007 को अधिसूचना जारी करते हुए भवन निर्माण समेत सरकारी इमारतों के लिए कई ऐसे प्रावधान लागू किए थे, जो यदि अमली जामा पहनते तो न केवल ऊर्जा की बड़ी बचत संभव थी, बल्कि वैकल्पिक ऊर्जा को भी प्रोत्साहन मिलता। सोलर हीटिंग सिस्टम, आईएसआई मार्का उपकरण, कॉम्पेक्ट फ्लोरोसेंट लैंप, इलेक्ट्रोनिक चोक सहित एनर्जी एफिसिएंट बिल्डिंग डिजाइन जैसे प्रावधान अब तक संबंधित सरकारी महकमों के स्तर पर बायलॉज संशोधित होने के अभाव में लागू नहीं हो पाए हैं।
नगर निगम, नगर विकास न्यास, हाउसिंग बोर्ड, सार्वजनिक निर्माण विभाग, नगर नियोजन विभाग, उद्योग विभाग, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, गृह व जेल सहित तकनीकी शिक्षा विभाग को अपने भवन निर्माण व अन्य बायलॉज व नियम-कायदों में इस अधिसूचना के अनुरूप आवश्यक संशोधन करते हुए कुछ प्रावधानों को सख्ती से लागू करवाने की व्यवस्था करनी थी। जहां तक जोधपुर की बात है, निगम व न्यास के अफसर इस तरह की किसी अधिसूचना से ही अनभिज्ञ हैं। नतीजतन, पुराने बायलॉज के अनुरूप ही भवन निर्माण की अनुमति दी जा रही हैं।
कहने के लिए राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम लिमिटेड को यह प्रावधान सुनिश्चित करने का नोडल विभाग बनाया गया है, मगर न तो इस विभाग की ओर से कोई मॉनिटरिंग की जा रही हैं और ना ही संबंधित अन्य महकमों ने अपने स्तर पर किसी अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाते हुए राज्य और जिला स्तर पर त्रैमासिक प्रगति विवरण भेजने की व्यवस्था सुनिश्चित की है।
कहां जरूरी सोलर वाटर हीटिंग सिस्टम
* ऐसे उद्योग, जहां गर्म पानी प्रोसेसिंग के लिए जरूरी हो।
* 100 बेड से ज्यादा वाले अस्पताल, र्न्िसग होम तथा जिला मुख्यालय स्थित जेल के बैरक
* होटल, मोटल और बेंकेट हॉल। रोजाना सौ से ज्यादा लोगों की आवाजाही वाली बड़ी केंटीन।
* 500 वर्ग मीटर या इससे अधिक क्षेत्रफल वाली कॉमर्शियल बिल्डिंग्स ।
* शहरी क्षेत्र में स्थित एक सौ वर्ग मीटर या अधिक क्षेत्रफल वाले आवासीय भवनों में।
* एक हजार वर्ग मीटर से इससे अधिक क्षेत्रफल वाली सरकारी आवासीय इमारतों व स्कूलें, कॉलेज, हॉस्टल, टेक्निकल व वोकेशनल एजुकेशन इंस्टीट्यूट, एजुकेशन एवं ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, टूरिज्म कॉम्पलैक्स, यूनिवर्सिटी, प्राइवेट हॉस्टल आदि।
ऊर्जा बचत के लिए विशेष लैंप
* अधिसूचना में ऊर्जा की बचत करने वाली कॉम्पेक्ट फ्लोरोसेंट लाइट और इलेक्ट्रोनिक चॉक के प्रयोग को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया है। सरकारी, अनुदानित, निगम, मंडल तथा स्वायत्तशासी संस्थाओं के नए भवनों के लिए अब परंपरागत चोक व बल्ब के प्रयोग पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।
* मौजूदों भवनों में भी निष्प्रभावी हो चुके बल्ब व पुरानी चोकों को बदलने के दौरान यह जरूरी कर दिया गया है कि अब उनकी जगह पर कॉम्पेक्ट फ्लोरोसेंट लैंप व इलेक्ट्रोनिक चोक का प्रयोग ही किया जाएगा।
* बचत के लिए इस अधिसूचना के प्रभावी होने के दो महीने के भीतर मोडिफाइड उपकरणों के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के प्रावधान हैं।
* सरकारी, अनुदानित, मंडल, निगम व स्वायत्तशासी संस्थाओं को इस तरह की व्यवस्था करने के लिए पाबंद किया गया है, जिससे बिजली की कम से कम खपत हो।
आईएसआई मार्का उपकरण
* अधिसूचना के बाद कृषि क्षेत्र में काम आने वाले मोटर पंप व पावर केपेसिटर के लिए आईएसआई मार्का होना अनिवार्य कर दिया गया है। नए बोरिंग या ट्यूबवैल कनेक्शन में ऐसे पंपों पर ही कनेक्शन दिया जाएगा।
* कृषि कनेक्शनधारकों को भी पावर लोड देखते हुए पंपों की जांच की जानी है।
* एनर्जी एफिसिएंट एयर कंडिशनर का उपयोग करने की बाध्यता।
* ऊर्जा संरक्षण अधिनियम के तहत जारी इस अधिसूचना के अनुरूप अभी बायलॉज में आवश्यक संशोधन नहीं किए गए हैं। जल संरक्षण के प्रावधान जरूर लागू किए गए हैं।
लक्ष्मण खेतानी अध्यक्ष, सरदारपुरा भवन निर्माण समिति यूआईटी
* ऐसी किसी अधिसूचना की अभी जानकारी नहीं है। प्रचलित बायलॉज के अनुरूप ही अनुमति दी जा रही है।
श्यामसिंह राजपुरोहित आयुक्त सरदारपुरा नगर निगम