जोधपुर. शहर में एकांतरे जल रहे प्लास्टिक के कचरा पात्रों (कंटेनर) की सुरक्षा को लेकर लंबे समय तक बेपरवाह रहे नगर निगम ने अब इसका विकल्प ढूंढ़
लिया है। निगम ने प्लास्टिक के स्थान पर माइल स्टील शीट से निर्मित कचरा पात्र खरीदने की तैयारी कर ली है।
पहले चरण में लोहे से निर्मित 2 सौ कचरा पात्र ( कंटेनर) के साथ अधिक क्षमता के दो बड़े डंपर खरीदने का निर्णय लिया है। 1.1 क्यूबिक मीटर क्षमता के प्रत्येक कचरा पात्र की कीमत 12 हजार तथा बड़े डंपर की कीमत 27 लाख रुपए है। इस तरह कुल 78 लाख रुपए के खर्च का अनुमान लगाया गया है। यह संसाधन 12 वें वित्त आयोग के मद से उपलब्ध करवाए जाएंगे। कचरा पात्र (कंटेनरों) की संख्या में तेजी से हो रही कमी को लेकर स्वायत्त शासन विभाग काफी चिंतित था। उसने पांच माह पूर्व लोहे से निर्मित कचरा पात्र खरीदने का प्रस्ताव निगम को भिजवाया था, लेकिन अनुमोदन नहीं होने से यह प्रस्ताव अटक गया था।
डेढ़ साल में सवा सौ कंटेनर नष्ट
केंद्र से एयर फील्ड टाउन में सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए प्राप्त 19 करोड़ की राशि में से संसाधनों के रूप में एनबीसीसी ने निगम को 1065 प्लास्टिक कंटेनर दिए थे। निगम ने इन कंटेनरों को रखवाने का न तो कोई नेटवर्क मैप तैयार किया और ना ही इनकी सुरक्षा के कोई इंतजाम किए। इसके विपरीत मनचाहे ढंग से इन्हें सभी वार्डो में रखवा दिया गया। इसके चलते ऐसी स्थितियां बनीं कि महज डेढ़ साल के भीतर करीब सवा सौ से भी ज्यादा कचरा पात्र या तो जल कर नष्ट हो गए या चोरी हो गए। देखा जाए तो हर तीसरे दिन एक कंटेनर कम होता जा रहा है।
20 लाख का नुकसान
शहर को कचरा मुक्त बनाने के उद्देश्य से करीब सवा साल पूर्व नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉपरेरेशन (एनबीसीसी) ने नगर निगम को 14 रिफ्यूज कलेक्टर तथा 1065 प्लास्टिक कंटेनर (कचरा पात्र) तथा इतने ही व्हील बैरोज उपलब्ध करवाए थे। प्रत्येक रिफ्यूज कलेक्टर की कीमत 7 लाख, प्रत्येक कंटेनर की लागत 14 हजार तथा व्हील बैरोज की कीमत एक हजार रुपए आंकी गई थी।
कंटेनर जलने के पुख्ता आंकड़े नहीं
निगम की मानें तो रजिस्टर में दर्ज आंकड़ों में आग से जलकर नष्ट हुए कचरा पात्रों की संख्या सवा सौ अंकित है, मगर अधिकारियों का कहना है कि सफाई सर्किल से कुछ रिपोर्ट आनी बाकी है जिससे यह आंकड़ा ज्यादा भी हो सकता है। एक अनुमान के तहत करीब डेढ़ सौ कचरा पात्र जलकर नष्ट हो चुके हैं। जिनकी लागत 20 लाख रुपए हैं।