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एक झटके में 7 अरब का फटका

अम्बाला .

केबिनेट ने यदि प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर दिए तो हरियाणा के गन्ना उत्पादक किसानों को सात अरब रुपए का सीधा नुकसान हो जाएगा। पहले से ही आर्थिक मंदी से जूझ रहे गन्ना उत्पादक किसानों को केंद्र सरकार का यह कदम बर्बाद कर देगा।

चीनी के रेट कम होने की वजह से कृषि मंत्रालय और योजना आयोग ने हर राज्य में गन्ने का एमएसपी रेट लागू करने का प्रस्ताव पास कर केबिनेट के पास भेजा है।

अभी तक प्रदेश सरकार को छूट होती थी कि वे अपने गन्ना उत्पादक किसानों को एमएसपी से अधिक रेट दे सकते थे। लेकिन इस प्रस्ताव के पास होने के बाद देश भर में गन्ना एमएसपी कीमतों पर बेचना अनिवार्य हो जाएगा।

हरियाणा ने हमेशा गन्ने का एमएसपी से ज्यादा भाव दिया : हरियाणा में गन्ना कभी भी एमएसपी भाव पर नहीं बिका। यहां गन्ने की कीमत हर साल अधिक दी गई। पिछले साल ही गन्ने का एमएसपी भाव 88 रुपए क्विंटल था, प्रदेश में सहकारी चीनी मिलों में गन्ने की कीमत औसतन 130 दी गई। यानी एमएसपी भाव से 42 रुपए क्विंटल अधिक।

गन्ने का एमएसपी भाव :

गन्ने का न्यूनतम मूल्य चीनी की रिकवरी पर तय किया जाता है। यदि गन्ने से नौ प्रतिशत चीनी की रिकवरी होती है तो किसान को प्रति क्विंटल 80 रुपए मिलेंगे।

इसके बाद यदि रिकवरी 0.1 प्रतिशत अधिक रिकवरी होती है तो रेट 90 पैसे प्रति क्विंटल बढ़ता रहेगा। हरियाणा में औसतन चीनी की रिकवरी दस प्रतिशत के आस पास बैठती है।

प्रदेश में गन्ने का रकबा

इस साल प्रदेश में कोआपरेटिव चीनी मिल क्षेत्र में दो लाख 21 हजार सात सौ 29 लाख हेक्टेयर गन्ने की बिजाई की गई। प्रदेश में एक हेक्टेयर से सात सौ क्विंटल औसतन गन्ने का उत्पादन होता है।

गन्ने का गणित

गन्ना एक वर्षीय फसल है और इसकी खेती पर किसान का एक साल में एक हेक्टेयर पर 15 हजार से अधिक खर्च आता है। किसान इसलिए गन्ने की खेती करता रहा क्योंकि प्रदेश सरकार एमएसपी रेट से हर साल अधिक रेट देती रही है।

यह भी सच है

हरियाणा शुगरफेड के सूत्रों के अनुसार गन्ने का रेट एमएसपी से अधिक होने की वजह से कोआपरेटिव क्षेत्र में शाहाबाद चीनी मिल को छोड़ कर दूसरी चीनी मिल भारी घाटे में जा रही हैं। क्योंकि केंद्र में चीनी के दाम एमएसपी पर तय किए जाते हैं। यदि इस घाटे को कम करने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए तो चीनी मिल खत्म हो जाएंगी।

केन्द्र के इस नए कदम से गन्ना उत्पादक किसान तबाह हो जाएगा। केंद्र सरकार ने ऐसा किया तो इसका विरोध होगा।

-किसान खेत मजदूर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष शमशेर सिंह सुरेजवाला

केन्द्र की एमएसपी दाम पर गन्ना खरीदने की कोशिश किसान विरोधी है। इससे यह सिद्ध होता है कि कांग्रेस पूरी तरह से किसान विरोधी है।

-अशोक अरोड़ा प्रदेशाध्यक्ष, इनेलो





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