झज्जर. सीएम भूपेंद्र हुड्डा प्रदेश सरकार की ओर से की जाने वाली घोषणाओं को इस कदर गोपनीय रखते हैं कि अपने पुत्र सांसद दीपेंद्र हुड्डा को भी नहीं बताते। यह बात सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने भास्कर से बिजली रैली की तैयारी के लिए किए जा रहे ग्रामीण क्षेत्रों के दौरे के दौरान विशेष बातचीत में कहीं। बिजली रैली के दिन कौन सी बड़ी घोषणा होगी इस सवाल पर उन्होंने बताया कि मैं आज तक ‘पापा’ के मन में चल रही प्लानिंग को नहीं जान पाया।
पापा से कई बार पूछने पर थोड़ी-बहुत जानकारी भी नहीं मिल पाती। गोहाना में हुई जमीन अधिग्रहण के बदले मिलने वाली रायल्टी की घोषणा से करीब घंटे भर पहले सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने सीएम से बातचीत की थी, लेकिन घोषणाओं की जानकारी मीडिया व कुछ अन्य साथियों ने फोन पर उन्हें दी। कार्यपालिका से सीधा संवाद न होने पर जनता को परेशानी
सांसद ने बताया कि लोकतंत्र के कार्यपालिका व विधायिका से जनता का सीधा संवाद नहीं हो पाता। जनता के ज्यादातर काम भी कार्यपालिका के इर्द-गिर्द घूमते हैं। जनता को अपनी बात अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए विधायिका व मीडिया के प्रतिनिधियों का सहारा लेना पड़ता है। जनता के लिए जनप्रतिनिधि व मीडिया तो जवाब देह है, लेकिन स्वतंत्रता मिलने के करीब 60 वर्ष बीतने पर भी कार्यपालिका उतनी जवाबदेह नहीं बन पाई है। इस बात को उन्होंने क्षेत्र में पिछले चार माह में किए जा रहे दूसरे दौरे के दौरान महसूस किया।
बिजली-पानी के मुद्दों पर विपक्ष के पास कुछ भी नहीं
प्रदेश सरकार के 1993 में हुए जल समझौते के तहत प्रदेश का यमुना नदी से मिलने वाली पानी का हिस्सा 74 से घटकर 47 फीसदी हो गया था। उस समय के बाद प्रदेश में चौथे मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा हुए हैं। पहले तीन मुख्यमंत्रियों के इस समझौते पर अब से पहले किसी को एतराज नहीं हुआ। जब मौजूदा प्रदेश सरकार ने इस समझौते को लेकर पुनर्विचार कमेटी का गठन किया तो सभी चिल्लाने लगे। यही हालत बिजली को लेकर बनी हुई है। इस समय प्रदेश में चार नए पावर प्लांट बनने की प्रक्रिया चल रही है। विपक्षी दलों द्वारा बिजली-पानी के नाम पर प्रदर्शनों के दौरान विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं से जनता को पूछना चाहिए कि उनकी सरकारों ने प्रदेश में बिजली-पानी बढ़ाने के लिए कौन से कदम उठाए थे।
उठाए क्रांतिकारी कदम
सांसद दीपेंदA मानते हैं कि सरकारी शिक्षण संस्थानों में प्राथमिक शिक्षा की हालत खस्ता है। देश भर में शिक्षाविद् प्राथमिक शिक्षा के गिरते स्तर पर ही चिंता जता रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्राथमिक शिक्षा के स्तर को भारती फाउंडेशन जैसी संस्थाओं द्वारा किए जा रहे प्रयास सराहनीय है। प्रदेश की सात हजार पंचायतों से 12 हजार युवाओं को गेस्ट टीचर के तौर पर नियुक्त किया है। शिक्षण संस्थाओं की दशा बदलने के लिए भी क्षेत्रीय विकास निधि का बड़ा हिस्सा खर्च हुआ है और एजुसेट, प्राथमिक स्तर पर अंग्रेजी को अनिवार्य बनाना क्रांतिकारी कदम है।
किसान को स्मार्ट इनवेस्टर
जमीन की कीमतें बढ़ने से क्षेत्र में किसान इतना समझदार हो गया है कि जमीन का पैसा हाथ लगते ही उसकी फ्यूचर प्लानिंग आरंभ कर देता है। क्षेत्र में कई छोटे किसान दूसरे प्रदेशों में बड़े जमींदार बन चुके हैं। जमीन की बढ़ती कीमतों के पक्ष-विपक्ष में उठने वाले राजनीतिक मुद्दों ने किसान को भटकने नहीं दिया।