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पीयूष हत्याकांड : तीन नकाबपोशों ने उलझाई गुत्थी

रोहतक.

पीजीआई कैंपस के 9-जे(16) में डा. प्रोमिला के 11 वर्षीय पुत्र पीयूष की हत्या की गुत्थी अब और उलझ गई है। तांत्रिक क्रियाओं के चलते हुए इस सनसनीखेज घटनाक्रम के बाद डा. प्रोमिला के बड़े बेटे ने जो बयान दिए हैं वह चौंकाने वाले हैं। वे बयान पुलिस के गले नहीं उतर रहे।

ध्यान दिला दें कि डा. प्रोमिला और उनका बड़ा लड़का अभिषेक भी इस हैरतअंगेज वारदात में चोटिल हुए थे। आपात्कालीन सघन चिकित्सा कक्ष में भर्ती डा. प्रोमिला को चिकित्सकों ने मंगलवार सुबह तक फिट घोषित नहीं किया। जबकि दोपहर को अभिषेक को कुछ समय तक फिट करार दे दिया गया।

पीजीआई चौकी के प्रभारी करतार सिंह दहिया ने अभिषेक के बयान कलमबद्ध किए हैं। अभिषेक के अनुसार उसके पिता डा. एके मलिक घरेलू नौकर प्रकाश को दिल्ली छोड़ने गए थे। घर पर वह, पीयूष और मां डा. प्रोमिला थे। बयान के अनुसार दोपहर ढाई बजे के करीब तीन नकाबपोश आए। उन्होंने पलंग पर सो रहे अभिषेक पर चाकू से हमला किया। इसके बाद डा. प्रोमिला और पीयूष को घायल किया। इसमें पीयूष की मौत हो गई। अभिषेक का बयान पुलिस की जांच में सहायक बनने की बजाए उलझन पैदा करने वाले बन गया है।

प्रोमिला के कहने पर दिल्ली गए थे मलिक

घटनाक्रम के बाद घर से गायब डा. प्रोमिला के पति सोमवार रात कैंपस में आए। उनके आने पर पुलिस इस नतीजे पर पहुंची कि कम से कम उनका इस घटना में हाथ नहीं है। डा. मलिक ने पुलिस और मीडिया को बयान दिए कि डा. प्रोमिला ने ही उनसे घरेलू नौकर को दिल्ली छोड़कर आने को कहा था। डा. मलिक का यह बयान भी हैरतअंगेज है कि डा. प्रोमिला ने उनसे कहा था कि परिवार पर जो मुसीबतें आने वाली हैं उसमें नौकर को कुछ न हो जाए। इसलिए उसे दिल्ली भेजा गया था।

डा. मलिक ने लगाए प्रशासन पर आरोप

डा. एके मलिक अपने पुत्र पीयूष की हत्या व पत्नी और बड़े पुत्र के चोटिल होने की घटना के बाद सोमवार रात से परेशानी में थे। उनकी परेशानी उस समय बढ़ी जब आपात्कालीन सघन चिकित्सा कक्ष में दाखिल पत्नी और बच्चे से उनको नहीं मिलने दिया गया। डा. मलिक ने मीडिया से कहा कि उनके घर में हुए इस घटना का जिम्मेदार पीजीआई प्रशासन है जिसकी वजह से वे अमृतसर में प्रेक्टिस कर रहे हैं और प्रोमिला यहां परेशान रहती थी।

मलिक के आरोपों को नकारा

पीजीआई के निदेशक डा. एसएस सांगवान ने डा. एके मलिक के उन आरोपों को सिरे से नकार दिया है, जिसमें डा. प्रोमिला और उनके बेटों पर हुए हमला का जिम्मेदार पीजीआई प्रशासन को बताया गया है। डा. सांगवान ने कहा कि डा. प्रोमिला संस्थान की सर्वश्रेष्ठ बेहोशी की डाक्टर हैं। उनकी बेहतर सेवाओं को देखते हुए उनकी कई बार आउटस्टैंडिंग एसीआर बनाई गई है। संस्थान में डा. प्रोमिला को कोई परेशानी नहीं थी। निदेशक ने कहा कि दिल दहला देने वाले इस घटनाक्रम से सभी द्रवित हैं।

मानसिक रोगी ही करते हैं तंत्र क्रियाएं

शहर के वरिष्ठ मनोरोग चिकित्सक डा. वीपी महला का कहना है कि मनोरोगी ही तांत्रिक क्रियाएं करते और कराते हैं। पीजीआई में हुए घटनाक्रम के बारे में पूछने पर डा. महला ने तर्क दिया कि अगर पुलिस मनोविज्ञान के दायरे में रहकर जांच करे तो घटना की गुत्थी सुलझाई जा सकती है। डा. महला ने एक सवाल के जवाब में कहा कि मनोरोग किसी पर भी हावी हो सकता है चाहे वह आधुनिक परिवेश में जीने वाला परिवार हो या कोई अगूंठाटेक।

पत्नी और पुत्र को रहस्यमयी बताया

डा. एके मलिक ने पत्नी और बच्चों को रहस्यमयी बताया है। अपने आवास के बाहर मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए डा. मलिक ने कहा कि वे स्वयं नास्तिक हैं, लेकिन प्रोमिला आडंबरों और पूजा-पाठ में विश्वास करती है। प्रोमिला और पीयूष भविष्य में आने वाले संकट के बारे में पहले से जानकारी होने की बात कहते थे। दिल्ली में रहने वाली प्रोमिला की बहन ने भी पुलिस को बताया कि प्रोमिला के सपने में कोई गुरूजी आते थे, जो उसे संकट को टालने का उपाय बताते थे।

स्कूल में सामान्य बच्चों की तरह था पीयूष

माडल स्कूल में पढ़ने वाले कक्षा छह के पीयूष की हत्या पर दु:ख जताते हुए प्रिंसिपल मंजू खन्ना ने कहा कि पीयूष स्कूल में सामान्य बच्चों की तरह सबसे व्यवहार करता था। पढाई-लिखाई में वह न ज्यादा कमजोर था न बहुत परफेक्ट। प्राचार्या ने कहा कि बुधवार को पीयूष के निधन पर स्कूल की सभी कक्षाओं में शोकसभा की जाएगी।

सवाल जो पुलिस के लिए पहेली बने

>> अभिषेक ने क्यों दिए नपे-तुले बयान। घर की परिस्थितियों को क्यों नहीं कराया कलमबद्ध?

>> अभिषेक ने शिवाजी कालोनी की राजबाला को क्यों नहीं बताया नकाबपोशों के बारे में?

>> कथित नकाबपोशों के जाने के बाद सिगेरट व कपड़े किसने जलाए। तेल किसने बिखेरा?

>> नकाबपोश क्या सिर्फ हमला करने आए थे उनका मकसद क्या था?

>> हमलावर ने प्रोमिला के हाथ की नस क्यों काटी, मम्मी के जलने की बात अभिषेक ने क्यों नहीं बताई?

>> घटनास्थल पर किसी बाहरी व्यक्ति के आने के सबूत पुलिस को जांच में क्यों नहीं मिले?

>> दोनों गेटों पर मौजूद संस्थान की सिक्योरिटी और पुलिस को हमलावर क्यों नजर नहीं आए?

अभिषेक के बयान घटनाक्रम के हालातों से मेल नहीं खा रहे हैं। इस बयान के साथ-साथ पुलिस अपने स्तर पर मामले को देख रही है। इसमें तंत्रक्रिया के चलते हत्या होने के बिन्दु पर भी जांच की जा रही है।

>>हनीफ कुरैशी,एसपी रोहतक





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