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वक्त की मार : धरोहर पर लीपापोती

अमृतसर.अमृतसर की विरासत इसकी शान है। चाहे वह धार्मिक हो या ऐतिहासिक। हर तरह से यहां की विरासत काफी अमीर है। रोजाना यहां हजारों पर्यटक आते हैं, लेकिन वे यहां पर स्टे नहीं करते हैं। अमृतसर जिले में हर ओर विरासत बिखरी पड़ी है, पर यह बड़े अफसोस की बात है कि उचित देखभाल और रखरखाव के अभाव में खत्म होती जा रही है। प्रशासन के पास पर्यटकों को लुभाने के लिए कोई खास योजना नहीं है। ऐसे में अमृतसर की जो धरोहर है, उसकी परतें धीरे-धीरे उखड़ने लगी हैं।

यही नहीं अमृतसराइट्स को अपनी इस अमूल्य धरोहर के बारे में कोई खास जानकारी भी नहीं है। लोकबाग अब एक ही कंपनी बाग को देखकर बोर हो चुके हैं। सिटी भास्कर ने शहर के इतिहासविदों व विद्वानों से यह जानने का प्रयास किया कि आखिर इस बिखरी धरोहर को कैसे विकसित किया जा सकता है।

समर पैलेस ऑफ महाराजा रणजीत सिंह स्थिति :

Samar Palaceदेख-रेख के अभाव में यह जर्जर स्थिति में है। सरकार ने इसे विकसित करने के नाम पर यहां महाराजा रणजीत सिंह पैनोरमा बनाया है। इसमें विश्व प्रसिद्ध कोहिनूर हीरे का डुप्लीकेट भी रखा गया है। महलों में आजादी से पहले ही क्लब स्थापित हो गए थे। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने इसे विकसित करने के लिए कुछ हिस्सा अपना लिया है और इसको मेंटेन करने के लिए कार्य भी शुरू कर दिया है।

पर्यटक :

जानकारी के अभाव में यहां बाहरी पर्यटक इक्का-दुक्का ही पहुंचते हैं, लेकिन शहर के लोग सुबह सैर के लिए जाते हैं। इनमें बुजुर्ग, बिजनेसमैन और महिलाएं अधिक होती हैं। शनिवार और रविवार को यहां सैर करने वालों की संख्या दोगुनी हो जाती है।

क्या किया जा सकता है :पार्क के अनकवर्ड एरिया में घास उगाई जा सकती है, लोगों को बैठने के लिए बैंच और पार्क में फूल-पौधे लगाकर इसे अच्छी तरह डेवलप किया जा सकता है।

रानी जिदां का महल

सिटी के बीचोबीच बस स्टैंड के पास हुसैनपुरा में एक हवेली है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यह रानी जिदां का महल है।

स्थिति :

rani jinda ka mahal रख-रखाव के अभाव में इस महल की हालत जर्जर है। आर्किटेक्चर का बेहतरीन नमूना इस महल की छतों की ऊंचाई 22 फीट है। इसकी लकड़ी की छत पर सिर्फ तूड़ी और मिट्टी का लेप लगा हुआ है। इसमें इक्का-दुक्का पर्यटक ही पहुंचता है।

क्या किया जा सकता है :

पंजाबी पत्रिका ‘अखर’ के संपादक परमिंदरजीत सिंह बताते हैं कि इस महल के भीतर सुरंग है, जो समर पैलेस की तरफ जाती है। अगर इसे अच्छी तरह से डेवलप किया जाए तो यह एक अच्छे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो सकती है।

सराय अमानत खां और अटारी बार्डरसिटी से इंटरनेशनल बार्डर की तरफ जाने वाले जीटी रोड पर स्थित है सराय अमानत खां। पुराने समय में जब दिल्ली से लाहौर जाना पड़ता था तो यात्रियों के काफिले रास्ते में पड़ाव के लिए इस सराय में रुकते थे। यह सराय आज भी मौजूद है।

स्थिति :

रखरखाव के अभाव में यह सराय खंडहर में तबदील होती जा रही है।

क्या हो सकता है : इतिहासकार देवधर बताते हैं कि सराय के आसपास अच्छे पार्क बनने और पर्यटकों के लिए राजस्थान की तर्ज पर इसमें रहने का प्रबंध करने से यह अच्छा टूरिस्ट प्लेस बन सकता है। अटारी बार्डर रास्ते में पड़ता है, बार्डर से वापस आने पर पर्यटकों का यहां पड़ाव बने तो इस जगह की रौनक बढ़ जाएगी। र्रिटीट सेरेमनी देखने के बाद यहां पर पर्यटकों को रहने और ट्रांसपोर्ट सुविधा दी जा सकती है।

यह कर सकता है प्रशासन>> बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर गाइड मैप प्रदर्शित किए जाएं

>> सस्ती ट्रांसपोर्टेशन फैसिलिटी दी जाए

>> स्थलों पर पार्क, टॉयलेट्स, पीने के पानी और कैं टीन का प्रबंध हो

>> सिक्योरिटी का प्रबंध हो

>> लाइटिंग का प्रबंध हो

>> स्थलों के पास ओपन एयर थियेटर विकसित किए जाएं

कहां से आएगा पैसा>> मेंटीनेंस के लिए एनजीओ या कंपनी को स्थलों के कुछ हिस्से को गोद दिया जा सकता है

>> स्थलों में रहने का प्रबंध राजस्थान की तर्ज पर किया जा सकता है

>> टिकट सिस्टम शुरू किया जा सकता है

>> कैंटीनों से आमदनी हो सकती है

पुल कंजरीगरजपुरा यानी पुल कंजरी। यह स्थल इंटरनेशनल बार्डर अटारी से महज तीन किलोमीटर दूर है। इसके बारे में कहा जाता है कि महाराजा रणजीत सिंह ने मुजरा करने वाली औरत मौरां से यहां शादी की थी।

महाराजा की ताजपोशी के लिए रखी गई दावत में जब मौरां ने यहां मुजरा किया तो महाराजा उस पर मोहित हो गए और उससे शादी कर ली। यहां स्थित छोटी नहर को पार करते वक्त जब मौरां की जूत्ती नहर में गिरी तो महाराजा ने रातोंरात यहां पुल तैयार करवा दिया और तब से इस स्थान को पुल कंजरी के नाम से जाना जाता है, हालांकि इसका असली नाम गरजपुरा है।

स्थिति : देखरेख के बिना यह स्थल जमींदोज होने के कगार पर है। इसके साथ ही तालाब है जहां पर महिलाओं और पुरुषों के अलग से नहाने का प्रबंध भी था, लेकिन रखरखाव के अभाव से यह कीचड़ के तालाब में बदल गया है।

क्या किया जा सकता है : इस स्थल पर रिसर्च कर रहे लेखक निर्मल अर्पण कहते हैं कि यहां पर पुराना शिव मंदिर है, जिस पर फ्रेस्को पेंटिंग्स बनी हुई हैं, जो धीरे-धीरे अपना महत्व खो रही हैं। अगर इस पूरे इलाके का संरक्षण किया जाए, तो यह एक अच्छा टूरिस्ट स्पॉट डेवलप हो सकता है।

बंडाला में हारा था सिकंदरगांव बंडाला में कभी कठ गणराज्य का किला होता था। सिकंदर जब विश्व विजय अभियान के लिए निकला था, तो कठ गणराज्य की सेना ने तीन महीने तक सिकंदर की सेना को टक्कर दी। अंत में सिकंदर को विश्व विजय का सपना पूरा किए बिना ही लौटना पड़ा। यहां के नाथ मंदिर और अन्य जगहों की खुदाई में हड़प्पाकालीन बर्तन, बीड्स और सात मंजिली सुरंगें मिली थीं।





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