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डॉलर प्रवाह पर लगाम कसेगा रिजर्व बैंक

मुंबई: वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने जब से रिजर्व बैंक को मार्केट स्टेबलाइजेशन स्कीम (एमएसएस) में बांड बेचने को हरी झंडी दी है, उम्मीद बनी है कि रिजर्व बैंक भारत आ रहे डॉलर पर लगाम कसेगा।

चिदंबरम ने कहा है कि सरकार इस वित्त वर्ष में चौथी बार एमएसएस लिमिट बढ़ाने को तैयार है, हालांकि सरकार के राजकोषीय घाटे पर इससे अतिरिक्त भार बढ़ जाएगा। भारत में इस साल जिस रफ्तार से डॉलर आया है, एमएसएस लिमिट बढ़ाना जरूरी हो गया है।

स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के मनोज स्वाईं का कहना है कि डॉलर का इनफ्लो पिछले कुछ माह में जबर्दस्त बढ़ा है। इसलिए एमएसएस की लिमिट बढ़ाने का कदम भी उतना ही चौंकाने वाला है।

विदेशी फंडों ने भारत में 18, 948.60 करोड़ रुपए का निवेश सितंबर 2007 में शेयर बाजार में किया है। साल में अब तक 54, 169 करोड़ रुपए अब तक शेयर बाजार में लगाए जा चुके हैं।

रिजर्व बैंक ने अब तक 142000 करोड़ के एमएसएस बांड बेचे हैं। उम्मीद है कि सरकार एमएसएस लिमिट में 50000 करोड़ रुपए की वृद्धि करेगी और यह लिमिट दो लाख करोड़ हो जाएगी। एचडीएफसी बैंक के चीफ इकानामिस्ट अभीक बरुआ का कहना है कि एमएसएस से रिजर्व बैंक को हस्तक्षेप करने का मौका मिल जाएगा।





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