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खलासी की नौकरी, लाइन में ग्रेजुएट-पीजी

जयपुर. इन युवकों के बायो-डेटा से सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि आज बेरोजगारी का आलम क्या है। इन आंकड़ों से यह भी साफ है कि पढ़े-लिखे युवकों में जॉब सिक्योरिटी को लेकर भी बहुत चिंता है। उत्तर पश्चिम रेलवे विभाग में डी ग्रेड के 4787 पदों के लिए देशभर से 8 लाख लोगों ने फार्म भरे हैं। इन पदों के लिए शैक्षणिक योग्यता सिर्फ आठवीं मांगी गई, जबकि आवेदकों में ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुट, एमबीए, बीएड और अन्य डिप्लोमाधारी भी शामिल हैं। अनुमान है कि राजस्थान से सबसे अधिक फार्म भरे गए हैं। इसमें भी ग्रेजुएट अधिक हैं। इन पदों में शारीरिक श्रम अधिक और वेतन कम है फिर भी इतने पढ़े-लिखे ये नौकरी करना चाहते हैं। पिछले सालों की तुलना में फार्म भरने वालों का प्रतिशत डेढ़ गुना बढ़ा है।

आंकड़ों पर नज़र डालें तो वर्ष 2002 में भी इन्हीं पदों के लिए 5 लाख आवेदन आए थे। रेलवे अधिकारियों के अनुसार पिछली बार के आवेदनों की संख्या को देखते हुए इस बार लिखित टेस्ट के साथ फिजिकल टेस्ट भी रखा गया है। इससे छंटनी में सहूलियत हो। फिजिकल टेस्ट की वजह से आवेदन कम आए है, वरना यह आंकड़ा दोगुने से भी कहीं अधिक होता।

भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि इन पदों के लिए आवेदन करने वाले ज्यादातर लोग प्राइवेट कंपनियों में बैक ऑफिस वर्कर या क्लर्क, मार्केटिंग या सेल्स रिप्रेजेन्टेटिव के रूप में कार्यरत हैं। लेकिन वे प्राइवेट सेक्टर में नौकरी के भविष्य को लेकर ंिचतित हैं। कुछ लोग ऐसे भी हैं जो सिर्फ सरकारी नौकरी पाना चाहते हैं, चाहे वह चपरासी की ही क्यों न हो।

एक रोचक तथ्य यह भी सामने आया कि कुछ मध्यमवर्गीय और आर्थिक रूप से संपन्न परिवारों के छात्रों ने भी इन पदों के लिए आवेदन किया है। इनमें से कई जाने-माने संस्थानों में मोटी रकम खर्च करके एमबीए, सीए, बीएड, एमसीए जैसे कोर्स भी कर रहे हैं। एमबीए कर रहे एक छात्र अमित (नाम बदलने की शर्त पर) का कहना है कि ‘मेरे परिवार के सभी सदस्य सरकारी नौकरी में हैं। उन्हें लगता है कि मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव बनकर भी मुझे समाज में सरकारी नौकरी जैसा सम्मान नहीं मिलेगा। उनके इसी दबाव की वजह से मैंने इस पद के लिए आवेदन किया है।’

* फार्मो की संख्या लगभग 8 लाख है। इसमें किन लोगों ने आवेदन किया है यह तो छंटनी के बाद ही पता चल सकेगा। इस बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता।
के.एल. इंखिया, चीफ पीआरओ, उत्तर-पश्चिम रेलवे

* सरकारी नौकरी में काम कम करना होता है, जबकि कॉपरेरेट ऑफिस में हार्ड वर्क होता है। इसके अलावा सरकारी नौकरी में रहते हुए आय के दूसरे रास्तों को भी आजमाया जा सकता है। इसलिए लोगों इसकी तरफ भागते हैं।
लीना परमार, एचओडी, समाजशास्त्र विभाग

फैक्ट फाइल
विभाग: रेलवे
आवश्यकता: डी ग्रेड कर्मचारी
कितने पद: 4787
फॉर्म भरे: 8 लाख (लगभग) युवाओं ने
वेतन: 5500 से 6000 रुपए तक (लगभग )
शैक्षणिक योग्यता: आठवीं पास
आवेदकों में ये भी: ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट, बीएड, एमबीए के अतिरिक्त कई तरह के डिप्लोमाधारी

क्या रहेगा काम
पद का नाम: — काम
गैंगमैन/ ट्रैकमैन — ट्रैक का रखरखाव (पटरियों के नट-बोल्ट चैक करना, बीच में पड़ी मिट्टी-रोड़ी हटाना आदि)
खलासी (यातायात): — गाड़ी का संचालन करना (स्टेशन से ट्रेन चालक को संदेश देना)
खलासी/ हेल्पर: — डिब्बे में मरम्मत व बिजली का काम
सफाईकर्मी: — स्टेशन और रेलवे कॉलोनियों की नाली/ सड़क की सफाई करना
कार्यालय चपरासी: — चाय-पानी पिलाना, ऑफिस में फाइल इधर-उधर पहुंचाना।

1. नाम: मिट्ठा लाल
निवासी: बिडोली, तह. लालसोट
शैक्षणिक योग्यता : बीए-बीएड में 64 प्रतिशत
आवेदन: गैंगमैन/ट्रैकमैन
इस नौकरी की चाह क्यों: गांव में रोजगार नहीं है। शहर में प्राइवेट नौकरियों में समय, मेहनत ज्यादा है और पैसे कम। सरकारी नौकरी में भविष्य सुनिश्चित हो जाएगा।

2. नाम: हिमांशु
निवासी: रेलवे कॉलोनी, जयपुर
शैक्षणिक योग्यता: एमकॉम, फिलहाल एमबीए- सैकंड सेमेस्टर। एक निजी कंपनी में कार्यरत।
आवेदन: गैंगमैन/ट्रैकमैन

3. नाम: विकास सकरवाल
निवासी: सांगानेर,
शैक्षणिक योग्यता: बीएससी में 58 प्रतिशत, फिलहाल कॉम्पिटिशन की तैयारी
आवेदन: गैंगमैन/ट्रैकमैन।
छोटे पद से शुरुआत करने में मुझे कोई बुराई नज़र नहीं आती। गांव में लोग आज भी शादी के लिए सरकारी नौकरी वाले को प्राथमिकता देते हैं।

४. नाम: महेंद्र सिंह राव
निवासी: मुरलीपुरा
शैक्षिणक योग्यता: एमकॉम, फिलहाल एक निजी कंपनी में नौकरी
आवेदन: खलासी/ हेल्पर
इस नौकरी की चाहत क्यों: सरकारी नौकरी में भविष्य सिक्योर है।





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