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ऊंट-राइका शोध पर दिल्ली से अमेरिका तक की नजर

बीकानेर. ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (एम्स) की साइंटिस्ट डॉ.उमा कांगा जहां अपनी टीम के साथ बुधवार को बीकानेर पहुंची वहीं अमेरिका की नोर्थ सेरेल यूनिवर्सिटी ऑफ अमेरिका ने बीकानेर के डायबिटिज रिसर्च सेंटर के साथ मिलकर शोध करने का करार किया।

नोर्थ सेरेल यूनवर्सिटी के सीईओ ने राज्य सरकार को बीकानेर में हो रहे ऊंटनी के दूध पर रिसर्च काम में जुड़ने का आग्रह किया था। स्वास्थ्य सचिव डा.गोविंद शर्मा की 24-25 सितंबर को हुई अमरीका यात्रा में इस बाबत करार को अंतिम रूप दिया गया। राज्य सरकार ने रिसर्च सेंटर के प्रभारी डा.आर.पी.अग्रवाल को इस आशय का पत्र भेजा है और जल्द ही अब अमरीकी वैज्ञानिक और डा.अग्रवाल मिलकर इस विषय पर शोध को आगे बढ़ाएंगे।

दूसरी ओर डा.उमा कांगा राइका जाति की जीन संरचना में मौजूद उस जीन का पता लगाने की कोशिश में बीकानेर आई है जिसके कारण इस जाति के लोगों को डायबिटिज नहीं होती। डा.कांगा की टीम ने बुधवार को जहां डायबिटिज रिसर्च सेंटर में राइका-नोन राइका लोगों के सैंपल लिए वहीं गुरुवार सुबह वह इस जाति की बहुलता वाले गांव में जाकर काम करेगी।

इंस्टीट्यूट ऑफ ज्योनोमिक्स एंड इंटीग्रेटेड बायोलोजी, दिल्ली, एनआईएन हैदराबाद, बिट्स पिलानी पहले से ही बीकानेर रिसर्च सेंटर के सहयोग से ऊंटनी के दूध और मधुमेह न होने के संबंधो पर शोध कार्य आगे बढ़ा रहे हैं। ऐसे में कहा जा सकता है, सुरसा के मुंह की तरह फैल रही बीमारी डायबिटिज पर नियंत्रण पाने की दिशा में दुनिया की निगाहें बीकानेर में हो रहे शोध पर हैं और दुनियाभर के लोग इससे जुड़कर नतीजों पर पहुंचना चाहते हैं।





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