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शिक्षक करेंगे बच्चों की यौन जिज्ञासा शांत

रायपुर. स्कूलों में यौन शिक्षा को लेकर बवाल के बाद अब इसे अवेयरनेस प्रोग्रोम के रूप में चलाया जाएगा। इसके लिए बनाए गए माड्यूल में भी परिवर्तन किए जा रहे हैं। नेशनल एड्स कंट्रोल सोसाइटी का सहयोग मिला तो अगले महीने से इसे स्कूलों में लागू कर दिया जाएगा।

इस मसले पर गठित कोर समिति की बैठक शिक्षा सचिव नंदकुमार की अध्यक्षता में हुई जिसमें हेल्थ, ट्राइवल, महिला एवं बाल विकास, मेडिकल एजुकेशन आदि विभागों के आला अफसर शामिल हुए। इसमें तय किया गया है कि 9 वीं से 12 वीं के छात्रों के लिए यह अवेयरनेस (जागरुकता) एवं ट्रेनिंग प्रोग्राम के रूप में स्कूलों में चलाया जाए। यह कतई कोर्स में शामिल नहीं होगा।

न ही बच्चों को इससे संबंधित किताबें उपलब्ध कराई जाएंगी। इस उम्र के बच्चों के मन में जिज्ञासाओं का भंडार होता है। वे शर्म की वजह से किसी से जानकारी नहीं लेते और गलत रास्ते पर चल पड़ते हैं। उन्हें शांत करने के लिए हर स्कूल से दो शिक्षकों को स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी के विशोषज्ञों द्वारा ट्रेनिंग दी जाएगी।

बायज स्कूल होने पर दो शिक्षक, गल्र्स स्कूल होने पर दो शिक्षिकाएं और को-एजुकेशन होने पर एक शिक्षक व शिक्षिका को ट्रेनिंग दी जाएगी। प्रयास रहेगा कि बायो बैकग्राउंड के टीचर्स को ट्रेनिंग में प्राथमिकता दी जाए। इसकी वजह यह कि वे मान शरीर के बारे में काफी जानकारी रखते हैं।

उल्लेखनीय है कि 2005 में तत्कालीन शिक्षा सचिव डा. आलोक शुक्ला ने यह कार्यक्रम शुरू करने की पहल की थी। इसके लिए स्टेट कोर कमेटी के साथ एससीईआरटी में सेल भी बनाया गया। हल्लामचने पर सरकार ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया।

यह केंद्र का प्रोग्राम है जिसे सभी राज्यों में अनिवार्य किया गया है। नेशनल एड्स कंट्रोल सोसायटी इसकी मानिटरिंग एवं फंडिंग कर रही है। राज्यों में इसे संचालित करने स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी मदद कर रही है।





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