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गधे-घोड़े भी गिने जाएंगे

रायपुर. horsw मनुष्यों की तर्ज पर पशुओं की जनगणना भी 15 सितंबर से 15 अक्टूबर तक की जा रही है। छग सहित पूरे देश में यह महाभियान चल रहा है। दिलचस्प यह कि इसमें उन्नत, देशी, पालतू या घुमंतू आदि सभी किस्म के जानवरों की जानकारी ली जा रही है।

अफसरों के अनुसार इंसान की उम्र अधिक होने की वजह से हर 10 साल और पशुओं की आयु कम होने से पांच साल में पशुओं की गिनती की जाती है। यह सिलसिला 1919 से चल रहा है। don

छग में पहली बार 2003 के बाद यह दूसरा मौका है। देश में यह 18 वां महाअभियान है। इसमें पशुपालन, शिक्षा, राजस्व, कृषि, मत्स्य व सहकारी विभागों के अधिकारी-कर्मचारी जुटे हैं। हजार अफसर केवल मानिटरिंग में लगे हैं। वे राज्यभर के 45 लाख घरों में जाकर निर्धारित फारमेट में जानकारी भर रहे हैं।

उन्हें हर घर की गिनती पूरी करने पर 3.50 रुपए मेहनताना मिल रहा है। विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर डा. एसएस गहरवार ने बताया कि आंकड़े 6 दिसंबर तक अपडेट कर लिए जाएंगे। उन्होंने अनुमान जताया कि उन्नत पशुओं में 130 फीसदी बढ़ोतरी और अन्य पशुओं में .59 प्रतिशत कमी हो सकती है।

इंसानों की खुराक तय होगी
अफसरों ने बताया कि आंकड़े केंद्रीय कृषि, पशुपालन व डेयरी विकास योजना विभाग को भेजे जाएंगे। पशु-पक्षियों की संख्या के आधार पर ही यह तय किया जाता है कि मनुष्यों के लिए कितने भोजन की जरूरत होगी।

जीवन उपयोगी दूध, अंडे, मांस आदि की पूर्ति का अनुमान हो जाने पर अन्य खाद्यान्न की पूर्ति का लक्ष्य तय किया जाता है। पशुपालन विभाग के अनुसार देश की कुल आय में कृषि के 23 प्रतिशत में से 6 फीसदी योगदान पशुपालन का है।

इनकी होगी गिनती
गाय, भैस, बकरी, कुक्कुट पक्षी, बतख, भेड़, सूकर, कुत्ता, मुर्गा-मुर्गी, खरगोश, टर्की, ऊंट, घोड़े, गधे, खच्चर आदि की गिनती की जाएगी। प्रदेश में केवल 360 गधे और केवल दो ऊंट बचे हैं।

जंगलों से शेर या बायसन ही लुप्त नहीं हो रहे बल्कि कस्बाई ऊंट और गधे जैसे उपयोगी जानवर भी विलुप्त हो रहे हैं। जिला वेटनरी सर्जन डा. एपी वाघे का कहना है कि उपयोगी जानवरों की नस्लें बचाना जरूरी है। चारागाहों की कमी की वजह से उनके लिए इन जानवरों को पालना मुश्किल हो रहा है।

प्रदेश में कौन-कौन कितने?
पशु संख्या
गधे 360
कुत्ते 412468
ऊंट 02
घोड़ा-घोड़ी 4007
खच्चर 52
मुर्गियां 8004859
बतख 51277
खरगोश 4899
गाय-बैल 8881719
भैस-भैंसा 1598041
भेड़-भेड़ी 120664
बकरा-बकरी 233572
शूकर 13577
(2003 की पशु गणना के अनुसार)





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