जोधपुर. उम्मेद भवन के ओरियंटल रूम में बनी स्टीफन नोर्बलिन की नायाब पेंटिंग्स का पुनरुद्धार किया जाएगा। प्रख्यात पोलिश चित्रकार स्टीफन नोर्बलिन ने 1946
से 1948 के दौरान उम्मेद भवन पैलेस के विभिन्न कमरों में ये अद्भुत पेंटिंग्स बनाई थी।
ओरियंटल रूम में उन्होंने स्थानीय और यूरोपियन शैली की मिश्रित स्टाइल में रामायण और महाभारत उकेरी थी। पचास सालों का लंबा समय और यहां के नमी भरे मौसम के चलते अब उनकी पपड़ी उखड़ने लगी थी। पिछले साल पोलिश फिल्म फेस्टिवल के दौरान जोधपुर आई मिसेज गोलेपियाक ने इन पेंटिंग्स में काफी रुचि दिखाई और इन्हें संवारने की जरूरत महसूस की। बातचीत के बाद पोलिश सरकार न केवल फंड देने को तैयार हुई, बल्कि एक्सपर्ट टीम भी भेज दी।
पोलिश आर्ट कंजरवेटर्स और रेस्टोरेटर्स की इस टीम ने एक महीने तक इन बहुमूल्य पेंटिंग्स को बचाने और संवारने की कवायद की। पिछले दिनों मिसेज मालगोरजाटा गोलेपियाक भी जोधपुर का दौरा कर चुकी है। अब बची हुई पेंटिग्स को संवारा जाएगा।
जोधपुर के आर्ट एक्सपर्ट पोलैंड जाएंगे
मिसेज गोलेपियाक ने मेहरानगढ़ के क्यूरेटर करणी सिंह जसोल और मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट के निदेशक (संस्कृति) महेंद्र सिंह नगर के साथ इस संबंध में विस्तार से चचा की। उन्होंने जोधपुर के दो एक्सपर्ट को पोलैंड भेजने की सलाह दी ताकि वे वहां से इन कलाकृतियों को बिना नुकसान पहुंचाए संवारने की कला सीख सकें। करणी सिंह के अनुसार अगले महीने यहां से दो कंजरवेटर पोलैंड जाएंगे। इसके अलावा सर्दियों में पोलैंड से तीन एक्सपर्ट जोधपुर आएंगे और पांच लोगों की यह टीम उम्मेद भवन पैलेस में स्टीफन नार्बलिन की सभी कलाकृतियों को संवारने में जुट जाएंगी। यह पूरा काम 2008 में पूरा होने की संभावना है।
कौन थे स्टीफन नोर्बलिन
स्टीफन नोर्बलिन जाने-माने पोलिश आर्टिस्ट थे और द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान भारत में फंस गए थे। उन्होंने 1941 में मुंबई के राजपरिवार के कुछ पोट्रेट भी तैयार किए। इसके बाद वे जोधपुर आए और यहां के पोर्ट पेंटर बन गए। 1946 से 1948 की अवधि तक यहां रहने के दौरान उन्होंने उम्मेद भवन पैलेस के कई कमरों को अपनी खूबसूरत पेंटिंग्स से सजाया। महाराजा और महारानी सूइट के फर्नीचर और दीवारों पर बनाई उनकी पेंटिंग ने चार चांद लगा दिए।