कोटा. कहते हैं, रिश्ते ईश्वर के यहां से बनकर आते हैं। यह बात तब सच हो गई, जब गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान गिरफ्तारी देने वाले दो गुर्जर साथियों के बीच जब उनके बेटे-बेटी का विवाह तय हुआ।
रानपुर के अस्थाई जेल नंबर 40 के पटेल सियाराम गुर्जर ने अपनी बेटी का ब्याह अस्थाई जेल नंबर 14 के गंगाराम गुर्जर के बेटे रघुवीर गुर्जर के साथ तय कर दिया। शादी की यह बातचीत मंगलवार की मध्यरात्रि बाद करीब एक बजे हुई। बातचीत के बाद सगाई की तारीख भी पक्की कर दी गई। अचरज की बात है कि सगाई की तारीख पक्की करने के सात घंटे पहले तक दोनों गुर्जर साथी एक-दूसरे को जानते तक नहीं थे।
दरअसल, आरक्षण के लिए जेल भरो आंदोलन के तहत मंगलवार को कोटा गिरफ्तारी देने आए बूंदी जिले के इंद्रगढ़ स्थित गेंतापुरा गांव निवासी सियाराम गुर्जर की मुलाकात शाम पांच बजे गंगाराम गुर्जर से हुई। गंगाराम बारां जिले के किशनगंज स्थित किशनाईपुरा गांव का रहने वाला है। रावतभाटा रोड स्थित डाइट प्रांगण में मिले दोनों साथी गिरफ्तारी के दौरान रानपुर अस्थाई जेल जाने वाली बस में बैठ गए। दोनों को अलग-अलग जेल में रखा गया।
सियाराम गुर्जर बताते हैं कि रात में चूंकि खाने की व्यवस्था नहीं थी, लिहाजा मंगलवार की मध्यरात्रि बाद करीब एक बजे वो जेल नंबर 40 से निकलकर जेल नंबर 14 के पास आ गए। वहीं पर अन्य गुर्जर साथियों के साथ गंगाराम भी बैठे थे। जाने कब बातचीत बेटे-बेटियों की होने लगी और सगाई तय हो गई। गंगाराम भी खुश हैं। वो अब जेल से निकलने के बाद देव उठनी का इंतजार करेंगे। इसके बाद शादी की बाकी रस्में पूरी करेंगे। सियाराम तो बेटी की यादगार शादी करने की बात कर रहे हैं।
* सगाई तय होने का पता चला तो बहुत खुशी हुई। दो अनजान साथी समधी बनने जा रहे हैं। इससे अच्छी मिसाल और क्या होगी।
—आरएन शुक्ला, अस्थाई जेल नंबर 40 के जेल अधीक्षक