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कानून के रखवाले ही फंसे

इंदौर. सेंट्रल जेल के कैदी पप्पू की हत्या में पुलिस ने २ जेलर सहित ५ जेलकर्मियों को गिरफ्तार कर लिया। मामले में 11 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं पर तत्कालीन जेल अधीक्षक लालजी मिश्रा बाहर हैं। वे डीआईजी जेल के रूप में पदोन्नत हो चुके हैं। पुलिस का कहना है जांच की जा रही है।

थाना एमजी रोड ने बुधवार सुबह सेंट्रल जेल के जेलर अमरसिंह मौर्य, प्रहरियों भगवानदीन, महेंद्रसिंह, फतेहसिंह तथा भोपाल में पदस्थ जेलर आर.के. शर्मा को धारा 302 के तहत गिरफ्तार किया। कोर्ट ने सभी को सेंट्रल जेल भेजने के आदेश दिए। इस मामले में सेंट्रल जेल के ही 11 कैदियों को पिछले महीने गिरफ्तार किया था। वे सभी जबलपुर, सतना, भोपाल, खरगोन, आलीराजपुर आदि जेलों में स्थानांतरित कर दिए गए।

घटनाक्रम :
सेंट्रल जेल में 25 मई को कैदियों के संघर्ष में घायल पप्पू उर्फ बाबूलाल बोरखड़े की 7 मार्च को इलाज के दौरान मौत हो गई थी। तब उसके परिजन ने कड़ा विरोध जताया था। कलेक्टर ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए और मृतक की पत्नी ग्यारसीबाई की ओर से वकील सोहनलाल नागर ने कोर्ट में परिवाद प्रस्तुत किया।

जेएमएफसी पावस श्रीवास्तव ने 25 मई को जेल अधीक्षक, दो जेलर, तीन प्रहरी व छह कैदियों सहित 12 पर हत्या का केस दर्ज करने के निर्देश दिए थे। जांच के बाद थाना एमजी रोड ने 30 जून को हत्या का केस दर्ज किया। टीआई ने कैदियों सहित कई लोगों के बयान लिए और पांच कैदियों को और आरोपी बनाया। उसके बाद कुल 17 आरोपी हो गए।

तत्कालीन एसडीएम विवेक श्रोत्रिय द्वारा की गई जांच में भी जेल अधीक्षक, पांचों जेलकर्मी व अन्य कैदी दोषी पाए गए थे। पांचों जेलकर्मियों को गिरफ्तारी के बाद उसी सेंट्रल जेल में भेजा गया जहां वे पदस्थ थे। दोपहर 2.30 बजे वे कैदी के रूप में दाखिल हुए तो सहकर्मी व कैदी कौतुहल से देख रहे थे। उन्हें बैरक नंबर तीन में रखा है।

डीआईजी का बचाव
ग्यारसीबाई का आरोप है पुलिस तत्कालीन जेल अधीक्षक को बचा रही है। उसे हत्या के केस से बाहर करने की फिराक में है। सीएसपी मनोज राय का कहना है अधीक्षक के खिलाफ ठोस सबूत नहीं मिले हैं।

सब इंस्पेक्टर पर हत्या का केस
तीन साल पहले खजराना क्षेत्र में हुए एनकाउंटर में सब इंस्पेक्टर संजय पाठक पर हत्या का केस दर्ज कर 15 नवंबर तक गिरफ्तार करने के निर्देश न्यायिक दंडाधिकारी पद्मेश शाह ने दिए। पाठक जिला पुलिस लाइन में पदस्थ है।

चर्मकार मोहल्ला, खजराना नि. 40 वर्षीय श्यामलाल उर्फ श्यामिया पिता गेंदालाल 13 सितंबर 04 को एनकाउंटर में मारा गया था। उसकी पत्नी रेमनबाई की ओर से वकील जयनारायण तिवारी व के.पी. गनगौरे ने कोर्ट में परिवाद पेश किया था। उसमें कहा था घटना के दिन खजराना थाने का कांस्टेबल राजेंद्र रघुवंशी समन तामील करने के बहाने श्यामलाल के घर आया और उसकी पत्नी से र्दुव्‍यवहार किया।

इस पर श्यामलाल ने गुस्से में भागते हुए कांस्टेबल पर रांपी से वार किए जिससे मौत हो गई। वह पत्नी को बताकर थाने चला गया। बाद में रेशमबाई को भी थाने ले गए जहां श्यामलाल को पीट रहे थे और बाद में सब इंस्पेक्टर ने सीने में गोली मार दी।

फिर उसे पुलिस वाहन में ले गए और रिंगरोड पर लाश फेंककर एनकाउंटर की कहानी बना दी। वकील श्री तिवारी ने बताया श्यामलाल के परिवार ने 12 अन्य पुलिसकर्मियों के नाम भी बताए थे। उनके खिलाफ सेशन जज के समक्ष अपील करेंगे।

गोली सीने में क्यों?
कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम पी.एस. बग्गा ने मामले की जांच कर 1 सितंबर 06 को पेश रिपोर्ट में लिखा था आरोपी भाग रहा था तो पैरों में गोली मारी जाती। सीने में गोली क्यों मारी? यह रिपोर्ट शासन को भेज दी गई थी।





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