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‘मैं बनना चाहता था पायलट’

चंडीगढ़. लॉरेंस स्कूल, सनावर के पूर्व स्टूडेंट और पूर्व केंद्रीय मंत्री उमर अब्दुल्ला ने ‘भास्कर’ से बातचीत के दौरान स्नावर स्कूल में बिताये अपने अनुभवों को शेयर किया। स्कूल के तीन दिन तक चलने वाले फाउंडर्स डे को उमर सेलिब्रेट करने आये थे। उमर इसी स्कूल के 1989 बैच के पास आउट हैं।

पायलट बनना चाहते थे

मैं हमेशा से पायलट बनना चाहता था और पॉलिटिशयन बनने का कभी सोचा तक नहीं था। स्कूल में मेरी काउंसिलिंग हुई थी तब भी यही कहा गया था कि मैं पायलट ही बनूंगा, लेकिन 1996 के इलेक्शंस ने मेरी जिंदगी का रुख राजनीति की तरफ मोड़ दिया। उमर ने 28 साल की उम्र में इलेक्शंस जीत लिया। उमर ने बताया कि वह अपना सारा काम समय पर करता है, यहां तक की खाना भी पूरे समय पर ही खाता है।

स्कूल में काफी बदलाव

पिछले 18 सालों में स्कूल में काफी बदलाव आया, फिर चाहे वह यूनिफॉर्म का हो या फिजिकल एक्टिविटीज का। हमारे टाइम में खूब सारी ड्रिल्स होती थी जो अब वक्त के साथ कम हो गई है। तब मोबाइल नहीं था और एसटीडी/पीसीओ के बूथ्स न के बराबर थे। अब तो लगभग सभी के पास मोबाइल है।

डाइट में भी फर्क जब मैं स्कूल से घर जाता था तो मम्मी कहती रहती थी कि मैं बहुत पतला हो गया हूं, दरअसल तब स्कूल डाइट भी बहुत अच्छी नहीं थी लेकिन आज के समय में खाने को सब कुछ है।

मेरे यादगार क्षण मेरे लिए वह दिन जिंदगी का सबसे यादगार पल था जब मैं एनसीसी का कमांडिंग अफसर बना था और तब राजेश पायलट (पॉलिटिशयन) चीफ गेस्ट थे। दूसरा सबसे यादगार पल जब मेरे पिता को किसी ने कहा कि आप उमर अब्दुल्ला के पिता हो।

दुनिया से कटा हुआ था

स्कूलिंग के दौरान मैं 4-5 महीनों तक अपने घर वालों से नहीं मिल पाता था और न ही इस दौरान मैंने टीवी देखा। हर वक्त सिर्फ पढ़ाई, पढ़ाई और पढ़ाई। मैं अपना समय बर्बाद करने के हक मैं नहीं था।

आतंकवाद ने पढ़ाई पर असर डाला

जम्मू और कश्मीर में सालों से चल रहे आतंकवाद ने वहां की पढ़ाई और नौकरियों पर काफी असर डाला है। एजूकेशन सिस्टम में हम दूसरे राज्यों के मुकाबले काफी पीछे हैं। साथ ही बड़ी इंडस्ट्रीज के ऑफिस जेएंडके में न होने की वजह से भी बेरोजगारी बढ़ी है। यहां तक कि स्माल स्केल इंडस्ट्रीज भी यहां अपना ऑफिस नहीं लगाना चाहती।

जीतूंगा चुनाव अपने फ्यूचर प्लांस के बारे में उमर ने बताया की अगले साल होने वाले चुनाव में वह जरूर जीतेगा और इसके लिए उन्होंने खास स्ट्रेटजी बनाई है जिसे वह अभी डिस्कलोज नहीं करना चाहता। चुनावों को लेकर मैं अभी से ही सतर्क हूं। मैं कोई भी रिस्क नहीं लेना चाहता हूं। मेरी मेहनत मुझे सफल बनाएगी।





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