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पुरुषों से ज्यादा श्रम कर रहीं आदिवासी महिलाएं

बिलासपुर. वन ग्रामों की आदिवासी महिलाएं पुरुषों की तुलना में अधिक श्रम कर रही हैं। ईजीएस के अंतर्गत निर्माण कार्यो के मस्टररोल में महिलाओं के अधिकाधिक नाम देखकर निरीक्षण करने गए अफसर चौंक गए, परंतु सत्यापन में बात सही पाई गई, तो उन्होंने पुरुषों को भी ज्यादा से ज्यादा संख्या में निर्माण कार्यो में भागीदार बनने कहा।

ग्राम पंचायतों में ईजीएस के अंतर्गत विभागीय तथा एजेंसी के अंतर्गत निर्माण कार्यो का इन दिनों सामाजिक अंकेक्षण चल रहा है। बुधवार को कलेक्टर सुबोध सिंह एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी जिला पंचायत अध्यक्ष मुनीराम साहू, जिपं सदस्य मायारानी सिंह ने वन ग्राम अचानकमार, लमनी, छरपवा, कोटा के भैंसाझार एवं बछालीखुर्द में सामाजिक अंकेक्षण का निरीक्षण किया। इस दौरान आदिवासियों ने अधिकारियों के समक्ष अपनी विभिन्न मांगे रखीं।

अचानकमार, लमनी के आदिवासियों ने भूमि समतलीकरण की दिशा में और कार्य कराने पर जोर दिया। छपरवा में हाईस्कूल की मांग की गई। इसी प्रकार उल्टी-दस्त से मृत व्यक्तियों के परिजनों ने आर्थिक सहायता की मांग की।

जिला पंचायत के सीईओ ने बताया कि ईजीएस के अंतर्गत जल संरक्षण के लिए डबरी निर्माण, बैगा विकास प्राधिकरण के अंतर्गत आदिवासियों को मछली बीज का वितरण किया जाएगा। उल्टी-दस्त से मृत आदिवासियों के परिजनों को सामाजिक सुरक्षा योजना के अंतर्गत 10-10 हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। छपरवा में हाईस्कूल की स्थापना के लिए राज्य शासन को प्रस्ताव भेजा गया है।





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