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फांसी के फरमान पर फैसला सुरक्षित

बिलासपुर. बलात्कार के बाद नाबालिग की हत्या करने के मामले में आरोपी को निचली अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने आज अंतिम तर्क सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित कर लिया। हाईकोर्ट में यह मामला सजा की पुष्टि के लिए भेजा गया था।

मामला कोटा थानांतर्गत ग्राम मोहंदी का है। 19 दिसंबर 2006 की रात मोहंदी की 11 वर्षीय कुमारी पिंकी उर्फ अपने दादा कोंदा गोंड़ के घर टीवी देखने गई थी। रात 9 बजे वह घर से बाहर निकली, तभी गांव के ही 21 वर्षीय तुलसीराम पिता शिराम मानिकपुरी अपने एक अन्य साथी के साथ वहां पहुंचा। पिंकी का मुंह दबाकर वे दोनों उसे जबरन उठाकर ले गए। अगले दिन सुबह एक ग्रामीण ने कोंदा को सूचना दी पिंकी की लाश गांव के रामसागर तालाब में पिंकी की लाश मिली है।

लाश को तालाब से बाहर निकालने पर पाया गया कि उसके गले पर धारदार हथियार से रेतने के निशान थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट व पुलिस विवेचना में बलात्कार के बाद हत्या की बात सामने आई। जांच के बाद कोटा पुलिस ने आरोपी तुलसीराम मानिकपुरी को धारा 376 (2)(जी) व 302 के तहत गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां 27 अगस्त 2007 को न्यायाधीश एट्रोसिटी महेंद्र राठौर ने उसे फांसी की सजा सुनाई।

इस मामले के दूसरे बाल आरोपी का प्रकरण बाल न्यायालय में लंबित है। तुलसीराम को फांसी की सजा के फैसले को पुष्टि के लिए हाईकोर्ट भेजा गया। इधर आरोपी ने भी सजा के विरुद्ध अपील की।

दोनों मामलों को संबद्ध कर जस्टिस एलसी भादू व सुनील सिन्हा की डिवीजन बेंच ने बुधवार को अंतिम तर्क सुनने के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया। सचिव छत्तीसगढ़ विधिक सहायता केंद्र की ओर से अखिल मिश्रा को आरोपी का वकील नियुक्त किया गया था, वहीं शासन की ओर से आशीष शुक्ला ने पक्ष रखा।





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satya prakash dadhich
Thursday, 4th Oct 2007, 7:11
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