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गांधी की तुलना पैगम्बर से करना धर्मभ्रष्ट कामः गीलानी

जम्मू. जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद के यह कहने कि महात्मा गाँधी किसी धर्म से ज्यादा अच्छे आदर्श हैं, पर विवाद खड़ा हो गया है। यहां तक कि जमायत-ए-इस्लामी और हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस के नेताओं ने ग़ुलाम नबी आज़ाद को 'धर्मभ्रष्ट' कह दिया है।

गाँधी जयंती पर एक कार्यक्रम में ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कहा था कि "हमने धर्मगुरुओं से और धर्मग्रंथों से जो कुछ सीखा वह परलोक में काम आएगा, लेकिन दुनियावी मामलों में, ख़ासकर राजनीति में महात्मा गाँधी से अच्छा उदाहरण नहीं हो सकता।"

लोकल मीडिया ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई हैं। यहां तक कहा गया है कि मुख्यमंत्री गुलाम नबी के महात्मा गाँधी के अनुयायी होने पर किसी को आपत्ति नहीं है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि गाँधीवाद के नाम पर वे मुस्लिमों की भावनाओं को आहत करें। इधर, हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के कट्टरपंथी धड़े के नेता सैयद अली शाह गिलानी ने गुरुवार को एक प्रेस कांफ्रेंस बुलाकर इस पर अपना विरोध जताया है।

सैयद अली शाह गीलानी का कहना है कि यह कहना कि हज़रत पैगम्बर के धर्मोपदेश, कुरान और इस्लाम परलोक के लिए हैं और इस दुनिया में गांधी की शिक्षा का पालन करना चाहिए, एकदम ग़ैर इस्लामिक है। उन्होंने महात्मा गांधी की तारीफ़ की और साथ ही मुख्यमंत्री के बयान पर कड़ी आपत्ति दर्ज की।

ग़ुलाम नबी आज़ाद की तुलना लेखक सलमान रुश्दी और तस्लीमा नसरीन से करते हुए गीलानी ने कहा कि इस तरह के बयान केवल वही लोग दे सकते हैं जो लोग धर्मभ्रष्ट हैं। यह सोच सलमान रुश्दी और तस्लीमा नसरीन की सोच जैसी है।

गुलाम नबी आज़ाद ने यह बयान गांधी जयंती पर आयोजित एक वादविवाद प्रतियोगिता में पुरस्कार वितरण समारोह में दिया था। बच्चों की यह प्रतियोगिता गांधी के अहिंसा के दर्शन विषय पर आयोजित की गई थी।





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