भोपाल. मुंबई के लीलावती हास्पिटल के मधुमेह रोग विशेषज्ञ डा. शशांक आर जोशी ने कहा कि पेट की चर्बी को नियंत्रण में रखने से डायबिटीज और हार्ट अटैक जैसी बहुत सी बीमारियों से बचा जा सकता है। बच्चों में डायबिटीज के केस बढ़ने का पहला कारण टीवी-इंटरनेट का ज्यादा उपयोग, खेलकूद में कम रुचि व एक्टिविटी से भरे काम न करना है।
दूसरा अनुवांशिक लक्षण, जिसमें यदि माता-पिता दोनों डायबिटिक हैं, तो बच्चे को डायबिटीज होने की आशंका 90 प्रतिशत होती है। डा. जोशी शनिवार को होटल जहांनुमा पैलेस में आयोजित राष्ट्रीय कार्डियो डायबेटोलाजी सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
दिनचर्या सुधारें:
अपोलो हॉस्पिटल दिल्ली के हदय रोग विशेषज्ञ डा. रवि कासलीवाल ने कहा कि डायबिटीज और हृदय से संबंधित बीमारियों के बचाव के लिए दिनचर्या सुधारने से लेकर दवाइयों का सेवन नियमित समय पर होना जरूरी है।
मुबंई के सेंट्रल रेल्वे हेड क्वार्टर हास्पिटल के हेड डिपार्टमेंट आफ मेडीशियन एंड कार्डियोलाजी डा. एसबी गुप्ता ने बताया कि हार्ट से संबंधित बीमारियों से बचने के लिए घी, तेल कम खाना चाहिए। नमक का उपयोग कम करना चाहिए।
डायबिटीज से बचने के लिए शक्कर और काबरेहाइड्रेट से युक्त चीजों का कम उपयोग करना चाहिए। हार्ट और डायबिटीज से ग्रसित व्यक्ति को प्रतिदिन 30 से 40 मिनिट तक तेज रफ्तार से पैदल चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन्सुलिन पंप आ जाने से डायबिटीज से ग्रसित व्यक्ति को अब इसका उपयोग करने में आसानी होगी।
यह पंप नवंबर माह तक भारत में आ जाएगा। सम्मेलन में मध्यप्रदेश के साथ ही दूसरे राज्यों के लगभग 500 डॉक्टरों ने भाग लिया। सम्मेलन एसोसिएशन आफ फिजीशियन्स आफ इंडिया, एमपी इंडियन कार्डियो डायबेटोलाजी सोसायटी द्वारा आयोजित किया गया।
ये बढ़ाते हैं डायबिटीज:
डा. शशांक आर जोशी ने कहा कि बाहर का खाना, जंक फूड, सफेद जहर जैसे शक्कर, ब्रेड, मैदा, चावल आदि का अधिक सेवन डायबिटीज को बढ़ावा देता है। कार्यक्रम के आयोजक डा. पीसी मनोरिया ने बताया कि डायबिटीज के 70 प्रतिशत मरीज हार्ट अटैक के कारण मर रहे हैं।
पांच शहरों में डायबिटीज पर जारी है रिसर्च
मुबंई के जसलोक हास्पिटल के मधुमेह रोग विशेषज्ञ डा. (प्रोफेसर) एचबी चंडालिया का कहना था कि बच्चों में डायबिटीज का कारण वायरस है, जिसमें उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता का डायरेक्शन उन्हीं की तरफ हो जाता है, जिसके कारण वे छोटी उम्र में ही डायबिटिक हो जाते है।
पिछले साल से देश के पांच शहरों में डायबिटीज पर चल रही रिसर्च के बारे में उन्होंने बताया कि ये रिसर्च सोसायटी स्टडी आफ डायबिटीज इन इंडिया द्वारा दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु और इलाहाबाद में हो रही है। ये रिसर्च उन लोगों पर की जा रही है, जो डायबिटिक होने की कगार पर हैं। यह रिसर्च दो साल तक और चलेगी, जिसमें 1500 लोगों पर परीक्षण किया जाएगा।