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यूका के कचरे को जलाने से गुजरात सरकार का इनकार

भोपाल. गुजरात सरकार के प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने शनिवार को आधिकारिक तौर पर स्पष्ट कर दिया है कि वह भोपाल की यूनियन कार्बाइड का लगभग 394 मीट्रिक टन जहरीला कचरा अंकेश्वर में लाकर जलाने की अनुमति मध्यप्रदेश सरकार को नहीं देगा।

इस कचरे को जलाने का फैसला जबलपुर हाईकोर्ट ने अगस्त 2007 में दिया था। कचरे को जलाकर नष्ट करने का विरोध अंकेश्वर के लोगों और गैस पीड़ित संगठनों ने किया था।

सूत्रों के मुताबिक शनिवार को गुजरात प्रदूषण मंडल के संजीव त्यागी ने इस आशय के आदेश जारी किए हैं कि इस जहरीला कचरे को गुजरात में लाकर जलाने की अनुमति नहीं दी जा सकी। गुजरात प्रदूषण मंडल ने भारत सरकार को भी इस संबंध में सूचित कर दिया है।

गैस पीड़ित संगठन की अर्चना ढींगरा के मुताबिक जहरीले कचरे का 346 मीट्रिक टन हिस्सा अंकेश्वर में जलाकर नष्ट करना था, जबकि शेष को पीथमपुर में नष्ट किया जाना था। उन्होंने बताया कि गुजरात सरकार ने जहरीला कचरा अंकेश्वर में जलाकर नष्ट करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया।

ज्ञात हो कि दो और तीन दिसंबर 1984 की दरम्यानी रात यूनियन कार्बाइड से रिसी जहरीली मिक गैस से हजारों लोगों की जान चली गई थी। यूनियन कार्बाइड में पड़े जहरीले कचरे को कहां नष्ट किया जाए, इसको लेकर हर स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। यूनियन कार्बाइड के आसपास के इलाके में कचरे के कारण भूजल स्रोत भी प्रदूषित हो रहे हैं। उसका पानी पीने से अनेक प्रकार की बीमारियों की भी शिकायतें हैं।





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