जोधपुर. टेक्सटाइल पार्क की आस बांधे बैठे शहर के उद्यमियों के अरमानों पर पानी फिर गया है। जोधपुर में टेक्सटाइल पार्क के लिए भूमि उपलब्ध करवाने का
वादा करने वाले उद्योग मंत्री नरपतसिंह राजवी ने टेक्सटाइल पार्क के मामले में अब हाथ खींच लिए हैं। उद्योग मंत्री के बयान बदलने के बाद यहां के टेक्सटाइल उद्यमियों के बयानों में भी मतभेद नजर आने लगा है।
उद्योग मंत्री ने भास्कर ने बातचीत में साफ कर दिया कि टेक्सटाइल पार्क के लिए केंद्र सरकार की ओर से दी जाने वाली सहायता राशि 40 करोड़ रुपए कोई मायने नहीं रखती और राज्य सरकार इतनी कम राशि के लाभ के लिए अपनी एक हजार एकड़ भूमि खराब नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि टेक्सटाइल पार्क के लिए केवल केंद्र सरकार 40 करोड़ रुपए की ही सहायता राशि दे रही है जो बहुत कम है।
शहर की भूमि के कीमतों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार की जोधपुर में टेक्सटाइल पार्क डवलप करने की कोई मंशा नहीं है। आश्चर्य कि खुद उद्योग मंत्री ने पूर्व में टेक्सटाइल पार्क के लिए जमीन उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया था और अब वे अपने वादे से मुकर गए हैं। वहीं शहर के उद्यमियों के बयानों में भी अब मतभेद नजर आने लगा है।
जोधपुर टेक्सटाइल हैंड प्रोसेसर्स एसोसिशन के अध्यक्ष अशोक कुमार संचेती का कहना है कि इस टेक्सटाइल पार्क से यहां के उद्योगों को कोई लाभ नहीं होगा। वर्तमान में टेक्सटाइल जोन के लिए जमीन की जरूरत है जिसके लिए उद्योग मंत्री राजवी ने सहमति दी है। टेक्सटाइल पार्क से नहीं टेक्सटाइल जोन से इन उद्योगों का विकास होगा।
वहीं टेक्सटाइल फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष गजेंद्र मल सिंघवी ने कहा कि यह जोधपुर के टेक्सटाइल उद्योगों के लिए बड़ा झटका है। केंद्र सरकार से 40 करोड़ के अलावा उद्योगों को विकसित करने के लिए कम ब्याज पर फंड मिलता। रोजगार के अवसर भी बढ़ते।
टेक्सटाइल हैंड प्रोसेसर्स एसोसिएशन के सचिव राजीव भंडारी का कहना है कि जोधपुर, पाली व बालोतरा सभी स्थानों के उद्यमी जोधपुर आकर टेक्सटाइल पार्क की सुविधाओं का लाभ उठा सकते थे। इससे न केवल जोधपुर बल्कि पश्चिमी राजस्थान के उद्योगों का विकास होता। टेक्सटाइल पार्क के लिए भूमि उपलब्ध करवाने के लिए राज्य सरकार को फिर एक बार विचार करना चाहिए।
क्या थी योजना
वस्त्र मंत्रालय की ओर से देश के विभिन्न शहरों में 25 टेक्सटाइल पार्क खोलने की योजना थी। केंद्रीय कपड़ा मंत्री शंकरसिंह वाघेला ने 27 सितंबर 2005 को जोधपुर प्रवास के दौरान स्थानीय उद्योगपतियों की मांग के अनुसार वस्त्र मंत्रालय की ओर से घोषित 25 टेक्सटाइल पार्क में से एक पार्क जोधपुर में भी बनाए जाने का आश्वासन दिया था। केंद्र की ओर से प्रति पार्क 40 करोड़ रुपए का इंवेस्टमेंट किया जाएगा।
क्या हश्र हुआ
वस्त्र मंत्रालय की ओर से टेक्सटाइल पार्क के शहर तय करने के लिए उद्यमियों की एक कंपनी तथा राज्य सरकार की ओर से भूमि की व्यवस्था की शर्त रखी गई थी। लेकिन टेक्सटाइल पार्क के लिए न तो टेक्सटाइल के उद्यमियों की टीम तैयार हुई और न ही राज्य सरकार ने इसके लिए भूमि देने की व्यवस्था पर सकारात्मक रुख अपनाया।
कुल टेक्सटाइल इकाइयां- 200
कुल कपड़ा उत्पादन- 4 लाख मीटर प्रतिदिन
क्या बनता है- कॉटन, सिफॉन, होजरी, जोरजट
क्या हैं चुनौतियां
* आधुनिकीकरण की जरूरत।
* भूमि की जरूरत।
* हैंड प्रोसेसिंग उद्योग के लिए आधुनिकीकरण योजना।
* राज्य सरकार व केंद्र सरकार से राहत।