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लक्ष्मीमल सिंघवी का निधन

जोधपुर. अंतरराष्ट्रीय विधिवेत्ता एवं पूर्व सांसद डॉ. लक्ष्मीमल सिंघवी (76) का लंबी बीमारी के बाद शनिवार दोपहर करीब डेढ़ बजे दिल्ली में निधन हो गया। मूलत: singhviजोधपुर निवासी डॉ. सिंघवी यहां से सांसद भी रहे। उनके निधन से यहां शोक की लहर फैल गई।

डॉ. सिंघवी की शवयात्रा दिल्ली स्थित निवास साउथ एक्सटेंशन से सुबह साढ़े 9 बजे रवाना होगी। यहीं लोदी रोड स्थित श्मशान घाट पर साढ़े दस बजे अंतिम संस्कार किया जाएगा। इसमें शामिल होने जोधपुर से भी सैकड़ों लोग रवाना हो गए हैं। उनके परिवार में पत्नी कमला के अलावा पुत्र अभिषेक मनु सिंघवी और पुत्री अभिलाषा है। अभिषेक कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता हैं। डॉ. सिंघवी पिछले डेढ़ महीने से हार्ट, किडनी व लीवर की बीमारी की वजह से दिल्ली स्थित मैक्स देवकी देवी अस्पताल में भर्ती थे। .

गूंदी मोहल्ले में पले-बढ़े : डॉ. सिंघवी जोधपुर के गूंदी मोहल्ला में पले-बढ़े। उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय से एलएलबी की। इसके बाद 1962 में वे तीसरी लोकसभा के लिए जोधपुर से सांसद चुने गए। 1998 में राज्यसभा के सदस्य मनोनीत हुए। इससे पूर्व 1991 से 1997 तक यूनाइटेड किंगडम में उच्चायुक्त रहे। डॉ. सिंघवी 1979 से 87 तक न्यायपालिका, न्यायविदों व वकीलों की निष्पक्षता तथा स्वतंत्रता विषय में संयुक्त राष्ट्रसंघ के विशेष प्रवक्ता रहे। वे भारत व लंदन के कई विश्वविद्यालयों में मानद प्रोफेसर भी रहे तथा कई सालों तक सुप्रीम कोर्ट में वकालत की।

अंतरराष्ट्रीय विधिवेत्ता, संस्कृति मनीषी लक्ष्मीमल सिंघवी : डॉ. लक्ष्मीमल सिंघवी ने नेपाल, बांग्लादेश और दक्षिण अफ्रीका के संविधान रचे। उन्हें भारत में अनेक लोकपाल, लोकायुक्त संस्थाओं का जनक माना जाता है। डॉ. सिंघवी संयुक्त राष्ट्र संघ मानवाधिकार अधिवेशन और राष्ट्रकुल (कॉमनवेल्थ) विधिक सहायता महासम्मेलन के अध्यक्ष, विशेषज्ञ रहे। वे ब्रिटेन के सफलतम उच्चयुक्त माने जाते हैं। वैसे वे सर्वोच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के चार बार अध्यक्ष रहे। उन्होंने विधि दिवस का शुभारंभ किया।

जोधपुर के स्वतंत्रता सेनानी दशरथमल सिंघवी के सुपुत्र डॉ. लक्ष्मीमल सिंघवी को हॉर्वर्ड, ऑक्सफोर्ड से लेकर बनारस हिंदू विश्वविद्यालयों तक में 25 से अधिक मानद और डॉक्टर ऑफ लॉ, डी लिट् की उपाधियां मिलीं। भारत सरकार से ‘पद्मभूषण’ मिला। वे नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के अध्यक्ष, गांधी विद्या मंदिर के कुलपति, भारतीय ज्ञानपीठ के अध्यक्ष, वत्सल निधि, कमल नयन बजाज ट्रस्ट, ज्ञान भारती न्यास, डॉ. हजारी प्रसाद द्विवेदी स्मृति न्यास के अध्यक्ष रहे। भारतीय विद्या भवन के वे पूर्व राष्ट्रपति आर. वैंकटरमण के साथ सह अध्यक्ष रहे। उनको इंडिया इंटरनेशनल का संस्थापक अध्यक्ष बनाया गया।

अंग्रेजी के प्रखर वक्ता एवं लॉयर होने के साथ डा. सिंघवी हिंदी और राजस्थानी के प्रकांड विद्वान एवं संस्कृत साहित्य के महामनीषी थे। जब अमेरिका में विवेकानंद का (शिकागो भाषण) शताब्दी समारोह मनाया गया तो डा. सिंघवी ने सर्वधर्म सम्मेलन की अध्यक्षता की। वर्तमान ‘पंचायती राज’ (संवैधानिक संशोधन विधेयक) के प्रारूप निर्माता भी डॉ. सिंघवी थे। बहुआयामी प्रतिभा के धनी होने के बाद भी वे सरल, तरल, सहज, निश्छल पारदर्शी एवं सात्विक पुरुष रहे।

जोधपुर के एम्बेसेडर
डॉ.लक्ष्मीमल्ल जोधपुर की धरती के सच्चे पुत्र थे। वे जहां भी जाते, अपने आप को जोधपुर से भेजा हुआ बताते। उन्होंने बचपन में स्काउट-गाइड में भरपूर सेवाएं दीं और इस पर उन्हें जीवन भर गर्व भी रहा।

शायरी के शौकीन
डॉ.सिंघवी कविता और शायरी के भी शौकीन थे। एक बार उन्होंने अपने मित्र के मार्फत शीन काफ निजाम की शायरी सुनने की इच्छा व्यक्त की। निजाम जब उनसे मिलने उम्मेद भवन पैलेस पहुंचे तो उन्होंने अपना आसन छोड़ कर उन्हें बैठाया और खुद श्रोता की मानिंद नीचे बैठ कर शायरी सुनाने का आग्रह किया।

पेड़ों के प्रति आस्था
भारतीय संस्कृति के प्रतीक पुरुष डॉ.सिंघवी की वृक्षों में गहरी आस्था थी। वे नियमित रूप से वैदिक मंत्रोच्चर के साथ पेड़ जरूर सींचते थे। वे चाहे सांसद रहे हों या किसी और संस्था से जुड़ गए हों, लेकिन वेतन के रूप में हमेशा एक रुपया ही लिया। वे सही अर्र्थो में अपरिग्रह के हिमायती थे।

मिठाई के शौकीन
डॉ.सिंघवी मिठाई के शौकीन रहे। उनके घर में हमेशा मारवाड़ी मिठाइयां तैयार मिलती थी। कोई भी मेहमान आता तो उन्हें मारवाड़ की मिठाई परोसी जाती। वे अपने साथ काम करने वाले छोटे से छोटे वर्कर को भी मारवाड़ी मिठाई भेजते और इसके फायदे भी गिनाते।

हर दल के चहेते
जोधपुर के सरदार स्कूल से छात्र नेता के रूप में राजनीतिक जीवन शुरू करने वाले डॉ.सिंघवी अंतरराष्ट्रीय स्तर के राजनेता बने। पं.नेहरू ने उन्हें कई पदों पर आसीन किया और कांग्रेस पार्टी ज्वाइन करने का भी आग्रह किया। वे तीसरी लोकसभा में निर्दलीय सांसद रहे। बाद में इंदिराजी, राजीव गांधी, वीपी सिंह और अटल बिहारी वाजपेयी ने भी उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी। वे कांग्रेस में भी रहे और बाद में भाजपा से जुड़ गए। सभी राजनेता उन्हें सलाह लेने के लिए आमंत्रित करते थे।

अपणायत के प्रतीक रहे
मारवाड़ की विख्यात अपणायत उनमें कूट-कूट कर भरी थी। वे कई देशों में रहे और जहां भी कोई जोधपुर का आदमी उनसे मिलने जाता, वे उसका स्वागत करते थे। उनका जात-पांत में विश्वास नहीं था। उन्होंने जीवन भर राजस्थानी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।

आदर्श भारतीय दंपती
डॉ.सिंघवी को विश्व के पचास से अधिक विश्वविद्यालयों ने मानद उपाधियां प्रदान कीं। बहुत अच्छे वक्ता होने के साथ ही वे अच्छे लेखक भी थे। उनकी पत्नी श्रीमती कमला सिंघवी भी लेखिका संघ की अध्यक्ष रही हैं। वे दोनों एक आदर्श भारतीय दंपती के रूप में जाने जाते थे।





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BL Sharma
Sunday, 7th Oct 2007, 10:09
We marwaris have lost a great marwari scholar, who got recognized for his good work globally. We are sure going to miss you, We are proud of you, Mr. Singhavi. May God bestow peace upon his soul and give the courage to his family to bear such huge loss.