bhaskar Web English
HomeNewsMetrosChandigarh Chandigarh

विर्क और परिजनों के नाम मिले 37 खाते

चंडीगढ़ पंजाब विजिलेंस ब्यूरो को राज्य के पूर्व डीजीपी एसएस विर्क व उनके पारिवारिक सदस्यों के करीब 37 बैंक खातों का पता चला है जिसमें आपस में करोड़ों रुपए का लेन-देन हुआ है। विर्क के एचडीएफसी बैंक के चार खातों का भी पता चला है, जिसमें करीब दो करोड़ का लेन-देन हुआ है। इससे रिजर्व बैंक के वे नियम भी टूटे हैं जिनके मुताबिक एक व्यक्ति एक ही खाता खुलवा सकता है।

विजिलेंस ने 2004 में चिमनी हाईट्स रिजॉट्र्स में हुई शादियों का ब्योरा और रिजॉट्र्स की तस्वीर भी कोर्ट पेश की है। विजिलेंस का मानना है कि विर्क इस रिजॉर्ट्स के निर्माण और इसकी आमदनी के बारे में इन्कम टैक्स विभाग और अपने महकमे को हमेशा गुमराह करते रहे हैं।

कहां से आए 70 करोड़: विजिलेंस ब्यूरो चिमनी हाईट्स निर्माण और जमीन खरीद के संबंध में 70 करोड़ का हिसाब पूछने की भी तैयारी कर रहा है। चिमनी हाईट्स की जमीन कुछ समय पहले विर्क और उसके भाई ने करीब 36 लाख में खरीदी थी, जिसमें विर्क ने अपना हिस्सा 13 लाख बताया था।

दिल्ली और पुणो में भी प्रॉपर्टी : विजिलेंस ब्यूरो को दिल्ली स्थित गोपाल टावर और पुणो में टीआरआर कंपनी के साथ विर्क की कमर्शियल प्रॉपर्टी का पता चला है। इसके अलावा हिमाचल में कसौली तथा मशोबरा में विजयपाल सिंह डिंपी के बेटे के नाम भी प्रॉपर्टी मिली है। विर्क की भाभी के नाम भी कुछ प्रॉपर्टीज की जानकारी मिली है। चंडीगढ़ के सेक्टर 9 में दो एससीओ का पता चला है।

रिजॉर्ट पहले बना, लोन बाद में विर्क ने चिमनी हाईट्स के लिए 2005 में बैंक से 5 करोड़ लोन लिया। उनके पिता ने 62 लाख 50 हजार उन्हें और 30 लाख उनके बच्चों को बतौर गिफ्ट दिया। इसी से चिमनी हाईट्स बनाए जाने की बात उन्होंने कही। लेकिन विजिलेंस जांच में पाया गया कि चिमनी हाईट्स तो 2004 में ही बन चुका था।

विर्क व डिंपी की जमानत याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रोपड़ के जिला एवं सैशन जज रेखा मित्तल ने पूर्व डीजीपी सुखदीप सिंह विर्क और सहअभियुक्त विजयपाल सिंह डिंपी की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए फैसला 8 अक्टूबर तक के लिए सुरक्षित रख लिया है। विजिलेंस ब्यूरो मोहाली ने 9 सितंबर को विर्क के खिलाफ आईपीसी तथा भ्रष्टाचार विरोधी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: