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कोटा में आधी जेलें खाली

कोटा. दो हजार से अधिक आंदोलनकारी शनिवार को अस्थाई जेलों से बाहर हो गए। इनमें से कुछ ने तो स्वत: ही जेल छोड़ दिया जबकि, ज्यादातर को मुचलके भरवाकर छोड़ा गया। प्रशासन के मुताबिक अब कोटा, बारां और बूंदी की जेलों में 5000 आंदोलनकारी रह गए हैं। रानपुर में अस्थाई जेल नंबर 4, 5, 15 और 11 खाली हो गई हैं।

इस बीच, गुर्जर नेताओं का आरोप है कि पुलिस-प्रशासन सख्ती करके आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रही है। जबरन बंदियों से मुचलके भरवाकर उन्हें अस्थाई जेलों से बाहर निकाला जा रहा है। राजस्थान गुर्जर महासभा के जिलाध्यक्ष रामलाल गुंजल ने कहा कि प्रशासन ने रानपुर की जेलों से आंदोलनकारियों को जबरन निकाला है। विरोध करने वालों को केंद्रीय जेल भेजा जा रहा है। इतना ही नहीं, गांवों में दबिश देकर आंदोलनकारियों के परिजनों को परेशान किया जा रहा है। महासभा के पदाधिकारियों को पकड़ा जा रहा है। गुंजल ने कहा कि प्रशासन अहिंसात्मक आंदोलन को बिगाड़ने की कोशिश कर रही है।

इधर, महासभा के युवा प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष तथा गोदल्याहेड़ी के सरपंच अशोक रोहर ने कहा कि जेडीबी गल्र्स कॉलेज अस्थाई जेल से गुर्जर नेताओं को गुपचुप तरीके से सेंट्रल जेल ले जाने की कोशिश की गई। शनिवार को इसका जमकर विरोध किया गया। रोहर ने कहा कि प्रशासन आंदोलनकारियों को धमका रही है।

इधर, पटवार केंद्र अस्थाई जेल से भी देर शाम 60 आंदोलनकारी बाहर हो गए। उनका आरोप था कि उन्हें जेल से निकाला गया है। इस बीच, जिला कलेक्टर आलोक ने बताया कि शनिवार को बारां, बूंदी और कोटा की अस्थाई जेल से कुल 2050 आंदोलनकारी चले गए हैं।

गुंजल के परिजनों के जेल भेजा
राजस्थान गुर्जर महासभा के जिलाध्यक्ष रामलाल गुंजल के अनुसार विधायक प्रहलाद गुंजल के परिजन रामकरण गुंजल तथा दयाल गुंजल को पुलिस केंद्रीय जेल ले गई है। गुर्जर नेताओं की महिलाओं को भी धमकाया जा रहा है।





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