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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. शिक्षाकर्मियों की भर्ती के लिए अनुभव प्रमाण पत्र का गलत सत्यापन करने के मामले में मस्तूरी के बीईओ रणजीत सिंह ठाकुर को अंतत: शासन ने सस्पेंड कर दिया है। जिला पंचायत के सीईओ सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी के प्रतिवेदन के आधार पर बीईओ को सस्पेंड करने के लिए कलेक्टर सुबोध सिंह ने शासन को लिखा था।
खबर है कि बीईओ के खिलाफ कार्रवाई का मामला दो महीने से लंबित था। बीईओ का एक नजदीकी सीएम हाउस में पदस्थ है, लिहाजा बीईओ को बचाने का काफी प्रयास हुआ। कार्रवाई चूंकि आईएएस लाबी से शुरू हुई थी, इसलिए उसे रोकने का प्रयास सफल नहीं हो सका।
जिला शिक्षा अधिकारी बीएल र्कुे ने बीईओ को सस्पेंड करने के आदेश की पुष्टि की है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार मस्तूरी विकासखंड के अंतर्गत जनभागीदारी हाईस्कूल दर्राभाठा का संचालन किया जा रहा है। जिला पंचायत के सर्वशिक्षा अभियान के परियोजना अधिकारी आनंद पांडे तथा अन्य अधिकारियों ने शिकायत के आधार पर स्कूल की जांच की, तो अनियमितता पाई गई।
दिलचस्प बात यह थी कि स्कूल का संचालन करने वाली जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष टेकराम श्रीवास तथा प्रधान पाठिका मीनाक्षी पांडे सहित पांच लोगों को इसी स्कूल में अध्यापन का प्रमाण पत्र जारी हुआ था। इसी आधार पर पांच लोगों को शिक्षाकर्मी के पद पर पदस्थ किया गया।
फर्जी प्रमाण पत्र का पता लगने पर पांचों शिक्षाकर्मियों को सेवा से बर्खास्त करते कथित स्कूल का सत्यापन करने वाले बीईओ के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को लिखा गया।
शिक्षाकर्मियों की नियुक्ति में फर्जी प्रमाण पत्र का सत्यापन करने के मामले में साल भर में यह तीसरा मामला है जिसमें बीईओ को सस्पेंड कर दिया गया। इससे पहले कोटा व पथरिया के बीईओ को सस्पेंड किया जा चुका है।