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छोटे रेल स्टेशनों पर भी मिलेंगे कम्प्यूटरीकृत टिकट

ग्वालियर. गांव के लोग भी तीन दिन तक का अनारक्षित टिकट खरीद सकेंगे। भारतीय रेलवे ने तय किया है कि देश के सभी छोटे स्टेशनों (हाल्ट व फ्लेग स्टेशन छोड़) पर अनारक्षित टिकट सिस्टम की मशीनें लगा दी जाएं। देश में छोटे स्टेशनों की संख्या करीब साढ़े नौ हजार है।

रेलवे ने यात्रियों को तीन दिन तक के अनारक्षित टिकट उपलब्ध कराने के लिए बड़े-बड़े स्टेशनों पर यूटीएस मशीनें लगवा दी हैं। इनमें ग्वालियर, झांसी के अलावा तहसील व जिला स्तर के कुछ स्टेशन भी शामिल हैं। यहां से पुराने सिस्टम (प्रिंटेड कार्ड टिकट) को हटा दिया गया। रेलवे अब रोड साइड के स्टेशनों पर भी यूटीएस की सुविधा देने के मूड में है। इसके लिए योजना तैयार हो चुकी है और वर्ष 2008-09 में स्टेशनों पर यूटीएस मशीनें लगा दी जाएंगी।

सूत्रों के मुताबिक रेलवे में करीब साढ़े नौ हजार रोड साइड स्टेशन हैं। उत्तर मध्य रेलवे में 350 के करीब व झांसी मंडल में 104 रोड साइड स्टेशन हैं। इन पर वर्तमान में प्रिंटेड कार्ड टिकट वर्षो से बांटे जा रहे हैं। कहीं-कहीं टिकट रिसैल के मामले भी रेलवे ने पकड़े हैं।

रेलवे को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके, इसके लिए यूटीएस मशीनें महत्वपूर्ण साबित होंगी। इन मशीनों के लग जाने के बाद स्टेशनों के आस-पास बसे गांव के लोग तीन दिन तक का टिकट कभी-भी स्टेशन आकर खरीद सकेंगे। इससे बुकिंग विंडो पर ट्रेन के आने के समय यात्रियों की भीड़ भी नहीं लगेगी।

दिनों दिन रेलवे में ट्रेनों की संख्या बढ़ती जा रही है। ऐसे में परिचालन विभाग पर काम का बोझ बढ़ रहा है। यूटीएस सिस्टम लगने से स्टेशन मास्टर के कंधों से वाणिज्य विभाग का काफी बोझ कम हो जाएगा। उसे टिकट मंगाने के लिए मांग पत्र नहीं भेजना पड़ेगा और हिसाब-किताब के लिए अलग से रजिस्टर रखने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। टिकट संबंधी सारा काम कम्प्यूटर में ही दर्ज रहेगा।

एक सिस्टम पर साढ़े पांच लाख का खर्चा
रेलवे को एक यूटीएस मशीन लगाने पर साढ़े पांच लाख रुपए खर्च करना पड़ते हैं। यदि स्टेशन पर सिविल वर्क (अलग से कक्ष) की जरूरत पड़ती है तो डेढ़ लाख रुपए और अतिरिक्त लग जाता है। रेलवे यूटीएस सिस्टम के लिए स्टेशन मास्टर को कम्प्यूटर सिस्टम के अलावा उसका प्रिंटर, यूपीसी और जनरेटर भी उपलब्ध कराएगी।

इसको स्टेशन मास्टर द्वारा संचालित किया जाएगा। सिस्टम दिल्ली के मुख्य सर्वे से जुड़ा रहेगा। रोड साइड स्टेशन के पहले डी व वी कैटेगरी के स्टेशनों पर यूटीएस लगा रही है। झांसी रेल मंडल में दतिया, मऊरानीपुर, चित्रकूटधाम, भिंड, धौलपुर, हरपालपुर,, महोबा, उरई आदि स्टेशन शामिल हैं। नैरोगेज के छोटे स्टेशनों को भी इस सुविधा से जोड़ा जाएगा।

>> झांसी रेल मंडल के 104 रोड साइड स्टेशनों पर यूटीएस की सुविधा अगले साल 2008-09 में शुरू होगी। यह काम तीसरे फेज में होगा। इससे कर्मचारी पर काम का बोझ कम हो जाएगा।
मनोज सिन्हा वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक झांसी रेल मंडल





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