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टैंक,बंदूक,गोले से अमन नहीं होता, अल्फाज का इस्तेमाल कीजिए। शब्दों को हथियार बनाइए। आर्टिफिशियल बैरियर को तोड़ने के लिए इन्टलेक्चुअल, राइटर, पोइट्स को लीड लेनी चाहिए। सब कुछ बांटा जा सकता है कविता व शायरी नहीं बांटी जा सकती। कुछ इसी तरह के जुमले सुनने को मिले इंडो-पाक मुशायरे में, जिसमें पार्टिशन के पहले व बाद का पंजाब एक मंच पर बैठा नजर आया। फाउंडेशन ऑफ सार्क राइटर्स एंड लिटरेचर की ओर से पंजाब विश्वविद्यालय और हरियाणा उर्दू अकादमी के सहयोग से ‘दोनों पंजाब’ के पोइट्री फेस्टिवल में भारत व पाकिस्तान के जाने-माने शायरों ने अपने कलाम पढ़े, लेकिन सबका मर्म यही था कि भारत व पाकिस्तान की विरासत सांझी है उसे किसी कीमत पर नहीं बांटा जा सकता। हरियाणा के गवर्नर ए.आर. किदवई ने इस मुशायरे का उद्घाटन किया।
पीयू के वीसी डॉ. आर.सी. सोबती ने इसे डायमंड जुबली फंक्शन की कड़ी बताया। हरियाणा उर्दू अकादमी के सचिव डॉ. के.एल. Êाकिर ने शायरों के तारूफ के साथ मुशायरे का संचालन किया। फाउंडेशन ऑफ सार्क राइटर्स एंड लिटरेचर की अध्यक्ष अजीत कौर ने पाकिस्तानी शायर अख्तर को 51 हजार रु.का लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड दिलवाया।
जिन शायरों ने कलाम पढ़े: पाकिस्तान से : किश्वर नाहीद, डॉ. सैयद अख़्तर हुसैन अख़्तर, असगर नदीम सैयद, रक्षांदा नावेद, शकील, शाहीन अब्बास, आरिफ ख़लीक, फारुख़यार अज़हर महमूद, सलीम काशर, अख़्तर इमाम रिज़वी और साइन अख़्तर। भारत से: संतोख सिंह धीर, जसविंदर, मनजीत, शहरयार, वसीम बरेलवी, मुजफ्फर हन्फी और अशरफ साहिल।
एक चीख़ है शायरी
जब पांव पर पांव पड़ जाता है तो एक चीख़ निकलती है। शायरी भी एक चीख़ है। औरत की चीख़। इंसान चांद पर पहुंच गया है पर औरत और मर्द के दरम्यान फासलों को पाटने के लिए काफी कुछ करना है। पाकिस्तान की हवा बदली है। हवा का मुकाबला चराग़ से है। चराग़ से चराग़ जल रहा है। ये कुछ विचार पाकिस्तान से आई नामवर शायरा किश्वर नाहीद के हैं।
वे पाकिस्तान और हिंदुस्तान के विकास में शायरों के योगदान पर कहती है- शायर न होते तो ख्वाब कोई न देखता। शायरी के बगैर वहशत, वहशी और इंसान में कोई फर्क नहीं देखता। इस समय पाक के हालात उन्हें चिंतित करते हैं। वे कहती हैं इलेक्शन है, पता नहीं चल रहा, किधर चित है किधर पट है।
साउथ एशिया में ऐसी फज़ां हो कि एक-दूसरे को शायरी सुना सकें, दिल दिखा सकें। -आर.एस. ख़लीक