जयपुर क्रिकेट में नित-नए प्रयोगों के लिए मशहूर रहे टीम इंडिया के पूर्व कोच ग्रेग चैपल ने राजस्थान क्रिकेट संघ (आरसीए) से जुड़ने के बाद गुलाबी नगरी की धरती पर पांव रखते हुए साफ-साफ कह दिया था कि वे आलोचनाओं से घबराने वाले नहीं हैं और अपने प्रयोग यहां भी जारी रखेंगे।
पिछले पांच दिन से चैपल यहां के युवा क्रिकेटरों के सामने कई प्रयोग कर चुके हैं, चाहे वह खिलाड़ियों से खाना बनवाना हो, टेबल-टेनिस व बैडमिंटन खिलाना हो या फिर जिम्नास्टिक का अभ्यास कराना। यह देखकर या सुनकर भले ही थोड़ा अटपटा लगे, लेकिन ट्रेनिंग लेने वाले खिलाड़ी इसका लुत्फ उठा रहे हैं और चैपल व उनके साथी इयान फ्रेजर के पास इन सारे प्रयोगों के तर्क हैं।
हर प्रयोग करने से पहले खिलाड़ियों को तर्क सहित जानकारी दी जाती है। अनौपचारिक बात में उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों से खाना बनवाने के पीछे मकसद था तय समय में खिलाड़ी मैदान पर अपने लक्ष्य को कैसे हासिल कर सकेंगे। सीमित संसाधानों के साथ खाना स्वादिष्ट भी होना चाहिए, यानि मैच का परिणाम जीत।
बैडमिंटन इसलिए खिलाया जाता है, क्योंकि इसमें शटल रुककर आती है और खिलाड़ी को इंतजार करना पड़ता है। ऐसा ही शॉट लगाने के समय होना चाहिए और गेंद का इंतजार करना चाहिए। टेबल टेनिस के माध्यम से चैपल टाइमिंग की सीख देना चाहते हैं। भविष्य में बॉक्सिंग, ट्रेकिंग, हर्डल क्रॉसिंग व टीले पर चढ़ना आदि एक्सर्साइज भी कराई जाएगी, ताकि खिलाड़ी शारीरिक व मानसिक रूप से सशक्त बन जाएं। चैपल के अनुसार जो खिलाड़ी इनमें सफल हो जाएंगे, उन्हें फिर क्रिकेट की प्रोपर ट्रेनिंग दी जाएगी। उन्होंने बताया कि इससे यह भी पता चल जाएगा कि खिलाड़ी फिट भी है या नहीं। जो फिट ही नहीं होगा, वह आठ घंटे के वनडे या पांच दिन के टेस्ट में कैसे मेहनत कर सकेगा।
विदेशी कोच की जरूरत नहीं : चैपल टीम इंडिया के पूर्व कोच ग्रेग चैपल ने कहा है कि इस टीम को विदेशी कोच की जरूरत नहीं है। जो भी व्यक्ति टीम को आगे ले जाने में सक्षम हो, उसे यह जिम्मेदारी दी जानी चाहिए, चाहे देशी हो या विदेशी। उन्होंने कहा कि कोच ऐसा व्यक्ति होना चाहिए, जो खिलाड़ियों में विकास की प्रक्रिया को आगे ले जाए। यह जरूरी नहीं है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचने के बाद खिलाड़ी का विकास रुक जाता है।