चंडीगढ़: टीम इंडिया की ट्वंटी20 विश्वकप में जीत सारी खुशी ऑस्ट्रेलिया से सात वन डे सीरीज के पिछले दो वन डे इंटरनेशनल में मिली करारी हार के बाद काफूर हो गई है। चंडीगढ़ में सोमवार को खेले जाने वाले सीरीज के चौंथे मैच में भारत के सामने सीरीज में बने रहने का अंतिम मौका होगा।
इस समय टीम इंडिया जिन हालातों से जूझ रही है उसे देखते हुए यह साफ है कि यह सब उसके लिए आसान नहीं होगा। उसके बल्लेबाज लंबी साझेदारियां नहीं कर पा रहे हैं। गेंदबाज रन रोकने में नाकाम हैं। पिछले तीन वन डे में वे 900 से अधिक रन लुटा चुके हैं।
चंडीगढ़ में जीत हासिल करने के लिए धोनी एंड कंपनी को अपना सबकुछ झोंकना होगा। सेक्टर 16 के इस मैदान में ऑस्ट्रेलिया की जीत का अर्थ इस सीरीज में उनकी हार की संभावना खत्म हो जाना है।
बल्लेबाजों का प्रदर्शन बना सिरदर्द: इस सीरीज में अब तक हुए सभी मैचों में भारतीय बल्लेबाजी बेहद खराब रही है। युवराज सिंह के अतिरिक्त सभी बल्लेबाजों ने शर्मनाक प्रदर्शन किया है। गौतम गंभीर और सचिन की सलामी जोड़ी पहले तीन मैचो में 1,11,10 रन ही जोड़ सकी है। इसके बाद मध्यक्रम ने भी लगातार निराश किया है। तेंडुलकर का प्रदर्शन उनकी प्रतिष्ठा के अनुकूल नहीं रहा है। हालांकि उन्होंने हैदराबाद में 71 गेंदांे पर 43 रन की पारी खेली थी, लेकिन उनका यह प्रदर्शन काफी नहीं है। राहुल द्रविड़ से उम्मीद थी कि वे कप्तानी का बोझ हटने के बाद बेहतर प्रदर्शन करेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वे हैदराबाद मंे ब्रेट ली की गेंद पर काफी शर्मनाक ढंग से आउट हुए। इनके साथ ही ट्वंटी20 स्टॉर गौतम गंभीर, रॉबिन उथप्पा और रोहित शर्मा भी मिल रहे अवसरों का सही लाभ नहीं ले सके हैं। कुल मिलाकर भारत की पूरी बल्लेबाजी की जिम्मेदारी युवराज और धोनी पर ही निर्भर है। यह निर्भरता टीम के लिए घातक साबित हो रही है।
हालांकि गेंदबाजों का प्रदर्शन तुलनात्मक दृष्टि से ठीक रहा है। लेकिन वे भी प्रभावित करने में नाकाम रहे हैं। जल्दी ही मिली सफलताओं का लाभ वे नहीं उठा सके। मध्यक्रम के बल्लेबाजों को बच के निकलने का मौका देना उनके लिए घातक साबित हुआ।