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मुंबई: आप अक्सर हैरान होंगे कि जब होम लोन की ब्याज दरें 10-14 फीसदी चल रही हैं, तब पर्सनल लोन 16-25 फीसदी ब्याज पर क्यों मिलता है?
कर्ज बांटने वाली संस्थाएं अक्सर तर्क देती हैं कि लोन के पीछे कोई कारण नहीं पूछा जाता और न ही कोई कोलैटरल गारंटी रहती है। बैंकों के पास ऐसी कोई चीज नहीं होती, जिसे बेचकर वे लोन का भुगतान कर सकें। यानी लोन का भुगतान करने वाले उस नुकसान की भरपाई भी करते हैं, जो लोन नहीं चुकाने से होता है।
वैसे होम लोन की तरह पर्सनल लोन को भी सस्ता बनाया जा सकता है। उसका तरीका यह है कि एफडी पर लोन लें। एक्सिस बैंक में रिटेल बैंकिंग के मैनेजर रत्नेश कुमार का कहना है कि एफडी पर लोन लेने की स्थिति में कर्जदार के डिफाल्टर होने पर बैंक एफडी तुड़वा सकता है। एफडी पर 9-12 फीसदी ब्याज मिलता है, जो पर्सनल लोन की ब्याज दर से कम होता है। अगर आपके पास कोई एफडी है तो आप उस पर लोन ले सकते हैं।
पैसा है तो लोन क्यों?स्टैंडर्ड चार्टर्ड में कंज्यूमर शाखा के प्रमुख मुरली नटराजन सवाल उठाते हैं कि किसी के पास धन है तो उसे लोन क्यों लेना चाहिए? वास्तव में एफडी पर लोन तभी लेना फायदेमंद है, जब आप एफडी नहीं तोड़ना चाहते हों और न ही पेनाल्टी चुकाना चाहते हों। ऐसे लोन एलआईसी पॉलिसी, एनएससी, आरबीआई बांड्स, सोने के आभूषण, शेयर और डिबेंचर पर भी लिए जा सकते हैं।
कम प्रोसेसिंग चार्ज: एक्सिस बैंक के कुमार का कहना है कि जब कोई एनएससी पर लोन मांगता है तो बैंक इसे पोस्ट ऑफिस को भेज देता है। पोस्ट ऑफिस सर्टिफिकेट जारी होने की पुष्टि करता है। ऐसे लोन पर ब्याज दरें तो कम हैं ही, आपको प्रोसेसिंग चार्ज भी कम चुकाना पड़ता है। जहां पर्सनल लोन पर 1-2 फीसदी प्रोसेसिंग चार्ज लगता है, वहीं एफडी या एनएससी पर लोन में केवल आधा फीसदी चार्ज चुकाना पड़ता है।