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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. मुट्ठीभर लोग, लेकिन उनके हौसले और जज्बे ने कंदई को ऐसी मुसीबत से उबार दिया जो हर साल बारिश में भयावह होती रही है। हाथ जोड़े, 40 हजार इकट्ठे किए और एक दिन पूरा गांव ने श्रमदान कर करीब ढाई किलोमीटर सड़क बना डाली। बाकी का डेढ़ किलोमीटर की स्थिति थोड़ी ठीक थी। इसलिए गांव अब मुख्यमार्ग से जुड़ गया।
बेमेतरा से महज 10 किमी दूर बसा कंदई मुख्य मार्ग से लगभग कटा हुआ था। ग्रामीण नेताओं और अफसरों को अर्जियां देते-देते थक चुके थे, लेकिन सड़क नहीं बनी। बारिश में ढाई किलोमीटर का सफर कोसों दूर लगता था। इस बारिश में गांव के तीन-चार युवाओं ने तय किया कि समस्या का हल वे खुद ही निकालेंगे।
उन्होंने पूरे गांव को एकजुट किया और खुद सड़क बनाने के लिए सहमत किया।1000 आबादी वाले इस गांव में सड़क बनाने के लिए हाथ तो मिल गए लेकिन मुख्य समस्या गिट्टी और मुरम की थी। अशोक पटेल, चेतन वर्मा, रघुवीर, परदेशी वर्मा और मुनेंद्र पटेल ने बताया कि पैसे की दिक्कत थी, इसलिए चंदे का फैसला लिया गया।
गांव में किसी ने 50 तो किसी ने 100 रुपए दिए और पंचायत फंड से 5000 रुपए जमा कर 40 हजार इकट्ठे किए गए। इससे गिट्टी और मुरम खरीदा गया। उसके बाद एक दिन बकायदा मुनादी कर गांव में श्रमदान की घोषणा हुई। रविवार को पूरा गांव सड़क बनाने में जुट गया। महिला, पुरुष, युवा और बुजुर्ग घर से रापा-गैंती लेकर सड़क बनाने में जुट गए।
इस काम में छोटे बच्चे और लड़कियां भी पीछे नहीं रहीं। पांच घंटे की अथक परिश्रम से ढाई किलोमीटर का रास्ता बन गया। पूरा गांव खुशी से झूम उठा मानों उन्होंने स्वर्ग का रास्ता बना लिया हो। सड़क बनाने से उनका हौसला इतना मजबूत हो गया कि वे इसे डामरीकरण कराने की सोच रहे हैं। इसके लिए वे किसी नेता के पास अर्जी लगाना नहीं चाहते।
>> गांव की सड़क के लिए पीडब्लूडी को प्रस्ताव भेजा था। लेकिन स्वीकृत नहीं हुआ। गांववालों ने सराहनीय कार्य किया है।
-रविंद्र चौबे, क्षेत्रीय विधायक, साजा