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उलझ गया परिसीमन

रायपुर.map केंद्र सरकार ने परिसीमन आयोग के प्रस्तावों को मंत्रिमंडलीय समिति के हवाले कर दिया है। माना जा रहा है कि सरकार इस मामले को लंबित करना चाहती है, ताकि चुनाव से पहले कोई विवाद न हो।

देश के 25 राज्यों में परिसीमन पूरा होने के बाद आयोग ने केंद्रीय विधि मंत्रालय को अनुशंसा भेजी थी कि जिन चार राज्यों में परिसीमन नहीं हो पाया है, उन्हें छोड़कर बाकी जगह इसे लागू कर दें।

बताते हैं कि केंद्र सरकार ने सबसे पहले इस प्रस्ताव पर सचिवों की समिति से रिपोर्ट तैयार करवाई। सूत्रों का दावा है कि सचिवों की समिति ने परिसीमन आयोग के अनेक प्रस्तावों पर असहमति जताई है।

इसमें कहा गया है कि जनसंख्या और क्षेत्र के आधार पर परिसीमन में काफी असंतुलन है। इस रिपोर्ट पर केंद्रीय मंत्रिमंडल ने चर्चा की और फैसला लेने के बजाय मामले को मंत्रिमंडलीय उपसमिति के हवाले कर दिया।

संकेत हैं कि परमाणु करार जैसे बड़े राजनीतिक मामलों में उलझी सरकार फिलहाल परिसीमन की नई मुसीबत पर हाथ नहीं डालना चाहती। परिसीमन का सभी राज्यों में विरोध तय माना जा रहा है। जैसे, छत्तीसगढ़ में ही आदिवासियों की पांच सीटें घट जाएंगी। इसी प्रकार अन्य राज्यों में भी 2001 की जनसंख्या के आधार पर परिसीमन किया गया है। इस कारण विरोध होने की पूरी संभावना है।

जहां तक चार राज्यों का सवाल है, असम, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम और नगालैंड में परिसीमन का काम पूरा नहीं हुआ। इन राज्यों की 2001 की जनगणना पर ही विवाद है। विदेशी मूल के नागरिकों के मामले में जनगणना को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।

छत्तीसगढ़ में परिसीमन का काम लगभग सालभर पहले पूरा हो चुका है। हालांकि यहां की 11 लोकसभा और 90 विधानसभा क्षेत्रों की संख्या में किसी प्रकार का फेरबदल नहीं हो रहा है, लेकिन आदिवासियों के लिए सुरक्षित विधानसभा की पांच सीटें कम करने की सिफारिश आयोग ने की है।

छग पर रुख नहीं बदला
आयोग ने छत्तीसगढ़ में 1971 की जनगणना को परिसीमन का आधार बनाने से इनकार कर दिया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में दायर याचिका के जवाब में आयोग ने कहा कि जब 2001 की जनगणना के आधार पर परिसीमन हो गया है, तो 1971 की जनगणना को आधार बनाने का औचित्य नहीं है। इस मामले में हाईकोर्ट में दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई हैं।





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