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रीजनल आर्ट, क्राफ्ट एंड डिजाइन सेंटर बंदी के कगार पर

ग्वालियर. मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश व राजस्थान के शिल्पियों के लिए ग्वालियर में बने रीजनल आर्ट, क्राफ्ट एन्ड डिजाइन सेंटर ठीक से चालू होने से पहले ही ठप होने के कगार पर पहुंच गया है। कपड़ा एवं विकास आयुक्त हस्तशिल्प भारत सरकार ने 22 फरवरी 2005 में ग्वालियर में साडा (विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण) की काउंटर मेग्नेट सिटी में मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश व राजस्थान के शिल्पियों के लिए रीजनल आर्ट, क्राफ्ट एन्ड डिजाइन सेंटर स्वीकृत किया था।

तत्कालीन साडा अध्यक्ष व संभागीय आयुक्त प्रभुदयाल मीना ने रीजनल सेंटर का प्रोजेक्ट तैयार कराया था और कपड़ा एवं विकास आयुक्त हस्तशिल्प भारत सरकार ने इसके लिए 90 लाख रुपए स्वीकृत किए थे, जिसमें से साडा को चार अप्रैल 2005 को 27 लाख रुपए की पहली किस्त का चेक भी केन्द सरकार ने भेज दिया।

पत्थर, काष्ठ व अन्य शिल्पों में एपेक्स समझी जाने वाली संस्था कारुकुल फाउंडेशन के पास इस रीजनल सेंटर का तकनीकी जिम्मा था। कारुकुल फाउंडेशन को रीजनल सेंटर में शिल्पियों को अंतरराष्ट्रीय मार्केट में मांग के हिसाब से सामान बनाने की ट्रेनिंग देने के अलावा तैयार माल को बेचने की जिम्मेदारी दी गई थी। तत्कालीन संभागीय आयुक्त ने रीजनल सेंटर के लिए मोतीमहल बैजाताल परिसर के पास एक भवन दे दिया और मेग्नेट सिटी में इसके विस्तार के लिए जगह भी आरक्षित कर दी थी।

साडा ने इस भवन में बिजली फिटिंग पर 7.68 लाख रुपए तथा मरम्मत व अतिरिक्त निर्माण पर 8.21 लाख रुपए व्यय किए। इसके अलावा 27 लाख रुपए से अधिक की मशीनें मंगवा लीं। दूसरी किस्त की आस में साडा ने भी इस प्रोजेक्ट पर 15 लाख रुपए से अधिक की राशि अपने बजट से व्यय कर दी।

कारुकुल फाउंडेशन ने प्रथम चरण में मध्यप्रदेश, राजस्थान व उत्तर प्रदेश के लगभग छह हजार शिल्पियों की ट्रेनिंग की तैयारियां कर ली लेकिन उसके बाद साडा व कारुकुल फाउंडेशन के बीच विवाद हो गया और कारुकुल फाउंडेशन ने इस प्रोजेक्ट से अपने हाथ खींच लिए। अब स्थिति यह है कि जो मशीनें इस रीजनल सेंटर के लिए साडा ने खरीदी थीं, उनकी गारंटी/वारंटी अवधि समाप्त हो चुकी है और सेंटर अभी तक चालू नहीं हो पाया है।

32 लाख पत्थर की टेबल ने किया आकर्षित
साडा के तत्कालीन अध्यक्ष संभागीय आयुक्त प्रभुदयाल मीना व अन्य साडा अधिकारी तीन वर्ष पूर्व दिल्ली में एक बैठक में भाग लेने गए थे। बैठक के बाद इन अधिकारियों ने हस्तशिल्प की एक प्रदर्शनी देखी। इस प्रदर्शनी में पत्थर की टेबल एक विदेशी ने 32 लाख रुपए में खरीदी। इसके अलावा पत्थर व लकड़ी के बने कलात्मक आयटम महंगे दामों पर हाथों-हाथ बिकते देख साडा अधिकारियों ने रीजनल सेंटर का प्रोजेक्ट तैयार किया था।

क्या था विवाद का कारण
रीजनल आर्ट, क्राफ्ट एन्ड डिजाइन सेंटर की एक्जीक्यूटिव काउंसिलिंग के अध्यक्ष प्रभुदयाल मीना को तत्कालीन नगर निगम व अन्य विभागों के अधिकारियों ने शहर के विकास के लिए भी सेंटर से सहयोग लिए जाने का आश्वासन दिया था।

इसका विवरण ढाई साल पहले हुई बैठक के मिनिट्स में दर्ज है। एक साल पहले जब सेंटर को शुरू करने के लिए कारुकुल फाउंडेशन ने एडवांस राशि मांगी तो साडा ने यह कह कर देने से मना कर दिया कि कारुकुल प्राइवेट संस्था है। इसके बाद दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया और कारुकुल ने इस प्रोजेक्ट से हाथ खींच लिए।

केन्द्र सरकार ने मांगा पैसों का हिसाब
कपड़ा एवं विकास आयुक्त हस्तशिल्प भारत सरकार ने साडा से 27 लाख रुपए की पहली किस्त का यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट मांगा है। इसके बाद ही केन्द्र सरकार इस सेंटर के लिए दूसरी किस्त देगा लेकिन सिाडा इसे रीजनल सेंटर के तौर पर शुरू करने की स्थिति में नहीं है।

राज्य सरकार की मदद से कर रहे ट्रेनिंग
मध्यप्रदेश हस्त शिल्प हथकरघा विकास निगम, साडा को प्रति ट्रेनिंग1.39 लाख रुपए की राशि दे रहा है। साडा स्थानीय शिल्पियों को यहां ट्रेनिंग दिला रहा है लेकिन जो हैवी मशीनें रीजनल सेंटर के लिए खरीदी गई थीं, उन्हें चलाने के लिए साडा के पास कोई दक्ष स्टाफ नहीं है। इसके अलावा ट्रेनिंग व अन्य कायरे के लिए भी साडा के पास स्टाफ नहीं है।

>> रीजनल आर्ट, क्राफ्ट एन्ड डिजाइन सेंटर को कैसे चालू किया जाए, इसके लिए साडा योजना बना रहा है। अभी मैं भोपाल जा रहा हूं वहां से लौटने के बाद इसकी समीक्षा करूंगा।
जय सिंह कुशवाह, अध्यक्ष साडा





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