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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior ग्वालियर. आतंकवादियों के स्लीपर सेल देशभर में फैले होने का खुलासा अभी हुआ है, इसके बाद प्रदेश में भी सतर्कता बरती गई है, प्रदेश में उन लोगों के बारे में मालुमात की जा रही है जो लांग टर्म वीसा लेकर देश में आए थे। ग्वालियर पुलिस को भी सतर्कता बरतने के निर्देश इसलिए दिए गए हैं क्योंकि दो साल पहले यहां स्लीपर सेल का एक सदस्य पकड़ा गया था।
वर्ष 2005 के मार्च महीने में नई सड़क की बृजविहार कॉलोनी से पुलिस ने माजिद खान नामक एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था। यह व्यक्ति चार साल से इस मोहल्ले में रह रहा था लेकिन किसी को इसके खतरनाक इरादों की कानों-कान खबर नहीं थी।
जब वह पकड़ा गया और पकड़ने का कारण लोगों के सामने आया तो वे अचंभित रह गए। इसके पकड़े जाने के बाद पहली बार स्लीपर सेल का उल्लेख आया था। तत्कालीन आईजी संजय राणा ने इस व्यक्ति को स्लीपर सेल का सदस्य कहा था।
लांग टर्म वीसा लेकर लापता हुए विदेशियों की तलाश
आतंकवादियों के स्लीपर सेल का खुलासा होने के बाद प्रदेश में भी सतर्कता बरती जा रही है। गृह सचिव संजय राणा के मुताबिक पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि वे उन लोगों के बारे में जानकारी जुटाए जो लांग टर्म वीसा लेकर भारत में आए थे और उसके बाद से उन्होंने अपने बारे में जानकारी पुलिस को उपलब्ध नहीं कराई है।
ऐसे लोग प्रदेश में कहां-कहां हैं और वे क्या कर रहे हैं यह जानकारी जुटाना पुलिस के लिए महत्वपूर्ण है। श्री राणा का कहना है कि लांग टर्म वीसा पर देश में आने के बाद अपनी उपस्थिति वही व्यक्ति छिपाएगा जिसका उद्देश्य गलत होगा। ऐसे लोगों की खोजबीन जरूरी है। चूंकि ग्वालियर में पहले भी एक पाकिस्तानी व्यक्ति स्लीपर सेल के सदस्य के रूप में पकड़ा गया है, इसलिए विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश यहां दिए गए हैं।
कैसे काम करती है स्लीपर सेल
-स्लीपर सेल के सदस्य जहां रहते हैं, वहां वे इस तरह का व्यवहार करते हैं कि जिससे लोगों को लगे वह उनके बीच का ही व्यक्ति है।
लोगों के दुखदर्द में मदद करते हैं और स्थानीय लोगों से नाते-रिश्तेदारी गांठने का प्रयास करते हैं।
-उन्हें जब अपने आकाओं का इशारा मिलता है तो वे आतंकी वारदात को अंजाम देने में देर नहीं लगाते हैं।
-चूंकि यह निष्क्रिय पड़े रहने के बाद अचानक सक्रिय होते हैं इसलिए इन्हें स्लीपर सेल कहा गया है।
यही लक्षण माजिद खान ने दर्शाए
बृजविहार कॉलोनी से पकड़ा गया माजिद खान भी स्लीपर सेल के सदस्य की तरह ही रह रहा था।
इसने मोहल्ले के लोगों से दोस्ती गांठ ली थी, फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस बनवा लिया था ताकि यह साबित किया जा सके कि वह ग्वालियर का ही निवासी है।
दोस्ती गांठने के साथ-साथ उसने यहां रिश्तेदारी भी बनाने का प्रयास किया था। उस समय पुलिस के सामने यह स्वीकार किया था कि उसकी मोहल्ले के ही एक परिवार में शादी की चर्चा भी चल रही थी, अगर वह पकड़ा नहीं जाता तो शादी भी कर लेता।
शहर क्यों है, संवेदनशील
शहर आतंकवादी हमलों के लिहाज से संवेदनशील है क्योंकि यहां आर्मी और एयरफोर्स के स्टेशन मौजूद हैं। सेना से संबंधित रिसर्च भी यहां होती रहती हैं। ग्वालियर के निकट ही आगरा और झांसी हैं ये भी सैनिक लिहाज से महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं।
दो साल पहले पकड़े गए माजिद खान और उससे पहले सुशील शर्मा के पकड़े जाने से यह भी सिद्ध हुआ है कि दुश्मन खतरनाक इरादे लेकर बैठा था लेकिन समय रहते वह पुलिस की गिरफ्त में आ गया।
बीट सिस्टम के बहाने स्लीपर सेल पर निगाह
स्लीपर सेल के निशाने पर देश के महत्वपूर्ण हिस्से होने की बात सामने अभी आई है लेकिन संदिग्ध व्यक्तियों को खोजने की कवायद पुलिस ने दो महीने पहले ही बीट सिस्टम के बहाने शुरू कर दी है अब लोगों की जानकारी जुटाने में अधिक सतर्क रहने के लिए कहा गया है।
आईजी डीएस सेंगर का कहना है कि पुलिस पहले से ही सतर्कता बरत रही है, बीट सिस्टम के अन्तर्गत शहर में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति की जानकारी जुटाई जा रही है, यह सिस्टम प्रत्येक संदिग्ध व्यक्ति से सतर्क रहने के लिए ही प्रारंभ किया गया था। अब स्लीपर सेल की बात सामने आई है तो बीट रजिस्टर बनाने में और सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
पुलिसकर्मियों से कहा गया है कि वे अपनी बीट में रहने वाले लोगों के व्यवसाय, परिवार और मिलने-जुलने वालों के बारे में जानकारी अपडेट रखें। उन्हें लगता है कि कोई अपनी असल पहचान छिपा रहा है तो उससे कड़ी पूछताछ करने से भी न हिचकें। श्री सेंगर कहते हैं कि इसके अलावा गृह विभाग से कोई और निर्देश आता है तो उस पर गंभीरता से कार्रवाई की जाएगी।