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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior ग्वालियर.
जयारोग्य अस्पताल समूह में डेंगू के लक्षण वाले दस मरीज भर्ती हैं। क्लीनिकल डायग्नोस के आधार पर डाक्टर इनका डेंगू का इलाज कर रहे हैं लेकिन कन्फर्मेशन के लिए इनके ब्लड सैंपलों की जांच कराई जा रही है।
जिले में अभी डेंगू का पैथोलाजीकली कन्फर्म डेंगू का एक भी मरीज नहीं मिला है लेकिन क्लीनिकली कन्फर्म दो दर्जन से अधिक मरीज सरकारी व गैर सरकारी अस्पतालों में भर्ती हैं। डाक्टरों के अनुसार अंचल के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल जयारोग्य अस्पताल समूह के पीडियाट्रिक्स विभाग के वार्ड में 25 फीसदी मरीज बुखार के हैं और इनमें से सात मरीज डेंगू के लक्षण वाले हैं।
जेएएच समूह के डाक्टरों का कहना है कि बुखार से पीड़ित मरीजों में प्लेटलेट कम होना, शरीर पर लाल दाने, सिर दर्द आदि लक्षण हों तो बीमारी डेंगू हो सकती है। इसी तरह मेडिसिन विभाग के वार्डो में भी तीन डेंगू के लक्षण वाले मरीज भर्ती हैं।
क्लीनिकल डायग्नोस के आधार पर तो डाक्टर इन्हें डेंगू का मरीज मान रहे हैं। हालांकि डेंगू की जांच के लिए विश्व में अभी तक सबसे भरोसेमंद पीसीआर (पालीमिरेट चेन रिएक्शन) टेस्ट माना जाता है लेकिन मध्यप्रदेश के किसी भी जिले में इसकी सुविधा नहीं है।
ग्वालियर में डिफेंस लैब में इसकी सुविधा है और स्वास्थ्य विभाग ने यहां से भी मदद मांगी है। जयारोग्य अस्पताल समूह के सहायक अधीक्षक डा.कमल भदौरिया का कहना है कि कालेज की माइक्रोबायोलाजी विभाग की लैब में डेंगू संभावित मरीजों के ब्लड की जांच हो रही है लेकिन छतरपुर के एक मरीज को छोड़कर अभी तक एक भी मरीज पाजीटिव नहीं मिला है।
डेंगू के लक्षण
-अचानक तेज बुखार का आना और दो से नौ दिन तक बने रहना।
तेज सिरदर्द, विशेषकर माथे में दर्द होना।
-जोड़ों-मांसपेशियों और शरीर में दर्द होना।
डेंगू हैमरेज के लक्षण
लगातार पेट में अत्यधिक दर्द होना।
नाक, मुंह आदि से खून आना।
लगातार उल्टियां होना या उल्टी में खून आना।
कोलतार की तरह काली लेट्रिन आना।
मुंह सूखना।
त्वचा का पीला और ठंडा पड़ना।
-कमजोरी महसूस होना।
त्वचा पर लाल छोटे धब्बे उभर आना।
बचाव
चूंकि डेंगू का मच्छर मादा इजिप्टाई दिन में काटता है इसलिए दिन के समय भी मच्छर से बचाव के उपाय करें।
पूरी बाजू वाले और अधिक से अधिक हाथ-पैर को ढकने वाले कपड़े पहनें।
शरीर के खुले हिस्सों पर मच्छर भगानेवाली क्रीम भी लगाई जा सकती है।
डेंगू का असर बच्चों पर जल्दी होता है इसलिए दिन में सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें।
कूलर-मटके या जहां पानी जमा रहता है वहां मच्छरों का प्रजनन होता है इसलिए नियमित सफाई की व्यवस्था करें।
यदि पानी की निकासी संभव न हो तो फिर सप्ताह में एक बार मिट्टी का तेल डालें।
डेंगू के लक्षण वाला बुखार होने पर तत्काल डाक्टर को दिखाएं व नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र में सूचना दें।
>> -मलेरिया या डेंगू मच्छर के काटने से होने वाली बीमारी है। हम मच्छरों के सफाए व बीमारी के बचाव के लिए जागरूकता अभियान चला रहे हैं। जहां कहीं भी मलेरिया या बुखार फैलने की सूचना मिल रही है, हम कीटनाशक दवा का छिड़काव कर रहे हैं। इसके अलावा हाई रिस्क वाले क्षेत्रों में मच्छरों के सफाए के लिए कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है। साथ ही बुखार से पीड़ित मरीजों की ब्लड स्लाइड बनाकर जांच की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है।
डा.आर.के सोनी, जिला मलेरिया अधिकारी