News
Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. अरपा नदी पर बने पुल-पुलिया की हालत इतनी खस्ता है कि इसके दोनों तरफ रहने वाले लोग रोज यह मनाते हैं कि भगवान..अरपा के पार जाना न पड़े। ब्रिज कारपोरेशन आफ इंडिया के गुणवत्ताविहीन निर्माण और प्रशासन की उदासीनता के कारण शहर के हजारों लोग रोज परेशान हो रहे हैं। इंदिरा सेतु, अरपा के पुराने पुल और शनिचरी के रपटा पुलिया के खस्ताहाल ने अरपा पार करना गंभीर समस्या बना दिया है।
सरकंडा, राजकिशोर नगर, देवनंदन नगर, साइंस कालेज, सब्जीमंडी, कृषि विश्वविद्यालय, एसईसीएल, कोनी, यूनिवर्सिटी से लेकर सेंदरी, रतनपुर, मोपका और सीपत तक के हजारों लोग रोज अपने व्यवसाय, नौकरी व दूसरे कामों से अरपा के इस पार बसे शहर में आते हैं। इस ओर से भी हजारों लोग पढ़ने, नौकरी अथवा दूसरे कार्यो से उस पार जाते हैं।
ये हजारों लोग अरपा पार करने के लिए इस समय मुख्य रूप से इंदिरा सेतु, पुराने पुल और शनिचरी रपटा पुलिया पर निर्भर हैं। राजकिशोरनगर में रहने वाले लोग तोरवा पुल का भी उपयोग करते हैं, लेकिन इनकी संख्या कम है। यहां से मुख्यत: वे ही भारी वाहन चलते हैं, जिन्हें सीपत जाना होता है। नेहरू चौक के पास 1995 में बना इंदिरा सेतु अरपा पार आने-जाने के लिए सबसे प्रमुखता के साथ इस्तेमाल किया जाता है।
ब्रिज कारपोरेशन द्वारा एसईसीएल की राशि से बनाए गए इस बड़े पुल से ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक 24 घंटे में करीब 18 हजार छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। इनमें 20 से 25 टन कोयला, राख, लोहा, मशीनें लेकर आने-जाने वाले बड़े ट्रेलर, कैप्सूल से लेकर गांवों से रोज कमाने-खाने शहर आने वाले सैकड़ों साइकिल चालक भी होते हैं। ये सभी वाहन चालक पिछले कुछ सालों से बदहाल हो चुके पुल से त्रस्त हैं।
भारी वाहन चालकों को तो ज्यादा परेशानी नहीं होती है, लेकिन कार-जीप और दुपहिए वाहन चालकों के लिए इंदिरा सेतु पार करना एक संकट बन गया है। पूरे पुल की सड़क पर गड्ढे हो गए हैं। पुल के दो स्लैब को जोड़ने वाले ज्वाइंट खुल गए हैं और वहां बड़ी दरारें हो गई हैं। लगभग हर 10 मीटर में ऐसी दरारे हैं। बार-बार मरम्मत और गड्ढों को भरने के कारण सीमेंट की परतों से पूरा पुल उबड़-खाबड़ हो गया है। यहां वाहन चलाना बेहद कठिन हो गया है।
इसके साथ ही कोयला, रेत व राख लेकर इस पर चलने वाले ट्रकों से पुल पर इतनी धूल व रेत फैली रहती है कि पूरे समय धूल का गुबार उठता रहता है। बनने के बाद से इस पुल की करीब 15 बार मरम्मत की जा चुकी है, लेकिन दो-तीन महीनों में ही पुल फिर खस्ताहाल हो जाता है। इसे लेकर आंदोलन भी हुए, लेकिन इसका स्थाई हल नहीं निकला। आज भी लोग मजबूरी में, प्रशासन को कोसते हुए पुल से गुजर रहे हैं।
अरपा के प्रताप टाकीज चौक के पास स्थित अंग्रजों के जमाने में बने पुराने पुल की हालत नए पुल से बेहद अच्छी है, लेकिन इसकी चौड़ाई नए पुल से आधी से भी कम है। यहां से भारी वाहनों को प्रतिबंधित करने के बाद भी सुबह 10 से 12 बजे तक और शाम 5 से 7 बजे तक लगातार जाम की स्थिति बनी रहती है। पुल के संकरे होने के कारण यहां से निकलने में एक घंटा तक लग जाता है।
ट्रैफिक पुलिस के पास कोई विकल्प नहीं होने के कारण उसने भी जाम रोकने से हाथ खड़े कर दिए हैं। अरपा पार करने के लिए तीसरा मुख्य रास्ता शनिचरी बाजार के पास बनी रपटा पुलिया है। इस पुलिया का चिंगराजपारा, लिंगियाडीह, चांटीडीह, सब्जी मंडी के हजारों लोग इसका उपयोग करते हैं, लेकिन पुलिया के दोनों तरफ बसे डेयरीवालों के मवेशियों, दोनों सिरों के पास स्थित सब्जी मंडी व पानी जमने के कारण पुलिया गंदगी से भरी रहती है।
नदी में थोड़ा पानी आते ही पुलिया पर से पानी बहने लगता है और नदी की गंदगी भी पुलिया पर आ जाती है। इसके चलते यहां से वाहन चलाना मुश्किल है। अरपा पार करने के तीनों मुख्य मार्गो की बदहाली को लेकर प्रशासन कोई गंभीर कदम नहीं उठा रहा है और लोग हलाकान हो रहे हैं।
क्या है इंदिरा सेतु की समस्या?
एसईसीएल की राशि से बने इंदिरा सेतु के उद्घाटन की इतनी हड़बड़ी थी, इसे बिना पर्याप्त वेयरिंग कोट के ही यातायात के लिए खोल दिया गया। नियमों के मुताबिक पुल की सड़क पर डबल वेयरिंग कोट कर एक्सपांशन ज्वाइंट (स्लैब के बीच की दरार) को भरा जाना चाहिए था।
इसके बाद कम से कम एक माह तक इस पर से यातायात बंद कर दिया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उद्घाटन की जल्दबाजी में आनन-फानन में पुल पर डामर बिछाकर दरारें छिपा दी गईं और पुल यातायात के लिए खोल दिया गया। इसके चलते दो माह बाद ही पुल की दरारें फैल गईं और सड़क पर गड्ढे हो गए।
कैसे दूर होगी समस्या ?
पीडब्ल्यूडी के ईई पंकज कश्यप कहते हैं कि निर्माण के समय की गई इस गलती को सुधारने के लिए पूरे पुल पर वेयरिंग कोट करना होगा, दरारें भरनी होंगी व गड्ढे को कांक्रीट से भरना पड़ेगा। इसके बाद करीब दो माह तक पुल पर से आवागमन रोकना होगा।
उनके अनुसार फिलहाल ऐसा संभव नहीं है, इसलिए पीडब्ल्यूडी हर साल बरसात के बाद मरम्मत कर पुल को परिवहन लायक बना देता है। इस बार भी दीवाली के बाद मरम्मत का कार्य फिर प्रारंभ किया जाना है। तुर्काडीह का पुल प्रारंभ होने के बाद इंदिरा सेतु से कम से कम भारी वाहनों का आवागमन रोका जा सकेगा। तब पुल की स्थाई मरम्मत हो सकेगी।