दो विंग कमांडरों सॆ बातचीत पर आधारित यात्रा वृत्तांत
नई दिल्ली
आज भारतीय वायुसेना अपनी प्लेटिनम जयंती मना रही है। इन 75 सालों में इस फौज ने मील के कई पत्थर गाड़े हैं। पर पिछले दिनों इसके दो विंग कमांडरों ने जो कर दिखाया, वह अभूतपूर्व है।
आश्चर्य है कि ज्यादातर लोग इन जांबाजों के कारनामे से बेखबर हैं क्योंकि सभी ओर क्रिकेट का शोर चल रहा है। राहुल नंदा और अनिल कुमार ने 80 दिनों में 257 घंटे उड़ान भरकर 40,529 किलोमीटर की दूरी तय कर दुनिया की परिक्रमा पूरी की। यह कारनामा उन्होंने ३क्क् किलोग्राम वजन के एक छोटे-हल्के से जहाज के मार्फत कर दिखाया। मकसद था युवकों में एडवेंचर का माद्दा पैदा करना। वे इसके लिए ढाई साल से तैयारी कर रहे थे।
वायुसेना अध्यक्ष एयर चीफ मार्शल होमी मेजर को उपन्यासकार जूल्स वर्ने की ‘अराउंड द वर्ल्ड इन ८क् डेज (८क् दिनों में दुनिया की परिक्रमा) की याद हो आई। उन्होंने अपने बहादुर अफसरों को याद दिलाया था कि उन्हें ९९ दिनों का पिछला रिकार्ड तोड़ना है। 1903 में राइट बंधुओं ने पहला जहाज उड़ाया था। 1924 से आज तक 179 पायलट दुनिया का चक्कर लगा चुके हैं, पर राहुल और अनिल का करिश्मा यह था कि इतने हल्के जहाज में उड़ कर 80 दिनों में परिक्रमा का विश्व रिकार्ड बनाया। दोनों ने 19देशों में 84 बार जहाज उतारकर पेट्रोल भरा। 17 देशों के ऊपर से बिना उतरे उड़ान भरी। कई बार पांच-पांच घंटे लगातार विमान उड़ाया। एक-दो बार तो लगा कि पेट्रोल की एक बूंद भी नहीं बची है।
हर देश में अलग मौसम मिला। रूस के साइबेरिया में शरीर जमाने वाली बर्फ। म्यांमार में दिल दहला देने वाला अंधड़। जब राहुल इस सफर की तैयारी कर रहे थे, तो लोग उन पर हंसा करते थे। आम उड़ानों के विपरीत उनके पास न वीजा था, न जहाज उतारने का परमिट।
उन्हें कई बार जान बचाने के लिए खेतों में उतरना पडा़ रूसी और चीनी सरकारों ने बंदिश लगा रखी थी कि वे पहले से तय नक्शे में कोई फेरबदल नहीं कर सकते। राहुल को केवल हेलिकॉप्टर चलाने का अनुभव था और अनिल लड़ाकू पायलट रहे हैं। दोनों के नजरियों में अक्सर अंतर रहता था। पर लड़-झगड़कर फिर शांति हो जाती थी और सफर शुरू हो जाता था।
सबसे अच्छा तजुर्बा
पाकिस्तान के कराची हवाई अड्डे पर एक एयर कामोडोर और एयरपोर्ट मैनेजर मिलने आए। कॉफी और सैंडविच के साथ जी भर के खातिर की।
दोस्ती दिखाने में..
सबसे ज्यादा मैत्री भाव अमेरिकियों ने दिखाया। आम धारणा है कि अमेरिकी रूखे होते हैं पर उनका अनुभव अलग रहा। राहुल और अनिल अमेरिका में 30 स्थानों पर पेट्रोल के लिए उतरे। इसका एक कारण यह भी था कि वे अलग-अलग देशों में उतरकर वीजा का झंझट बढ़ाना नहीं चाहते थे।
यूरोपीय देशों में बेरुखी
यूरोपीय देशों में उन्हें बेरुखी दिखाई दी। वहां लोग काम से काम रखते हैं। किसी के पास किसी के लिए कोई वक्त नहीं है।
..और रूस में
रूस में राहुल को अनिल से अलग कर दिया गया। वहां हर जहाज में रूसी मार्गदर्शक जरूर होता है। जहाज में केवल दो लोगों के लिए जगह होने के कारण उन्हें अलग सफर करना पड़ा। राहुल ने यह पूरा सफर दो कमीजों और एक जींस में तय किया। कैसे मुमकिन हुआ, इस पर वे खामोश रहे। उनकी चमकती आंखें बता रही थीं कि यह कितना मजेदार रहा होगा। उनका आखिरी जुमला था- अब मैं हर हाल में जी सकता हूं।
सफर ने ईश्वर में आस्था बढ़ा दी-राहुल नंदा
इस यात्रा में ईश्वर के प्रति राहुल की आस्था बहुत बढ़ गई। वे अपने साथ हनुमान चालीसा ले गए थे। उन्हें अकसर गायत्री और महामृत्युंजय जाप याद आता था। कई बार तो मौत सामने खड़ी दिखाई दी। जीवन में किए अच्छे-बुरे काम याद आए। घर-परिवार आंखों के सामने आ जाता था। हालांकि उन्हें सैटेलाइट फोन और इंटरनेट उपलब्ध थे और वे अपनी पायलट पत्नी से रोज बात करते थे, पर अंतत: वे अकेले ही थे। इस सफर से वे एक बेहतर इंसान बनकर लौटे हैं। उनके मन से ईष्र्या, मुकाबले, लालच और छोटे बड़े का अहसास खत्म हो गया।
उन्हें इस कारनामे में वायुसेना का पूरा समर्थन, सहयोग और समन्वय मिला। पूरे अभियान पर पांच करोड़ रुपए खर्च हुए। हालांकि ढाई बरस तक उन्होंने पल्ले से खर्च करके तैयारी की थी। उन्हें किसी इनाम की दरकार नहीं है, पर उनका विश्वास है कि उनकी मेहनत आंकी जाएगी। कहने को यह दुनिया का चक्कर था, पर इसमें अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और आस्ट्रेलिया को छुआ भी नहीं गया। तकनीकी दृष्टि से उन्होंने विश्व की परिक्रमा की, पर देशों की संख्या 200 से अधिक है और हर देश में उतरना और फिर उड़ान भरना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं था।
छोटा होने के कारण यह जहाज 10 हजार फुट की ऊंचाई पर ही उड़ा। कभी-कभी मौसम ने उन्हें 14,000 फुट पर चढ़ने के लिए विवश किया, लेकिन जैसे ही ऑक्सीजन की कमी महसूस हुई, वे नीचे खिसक आए। ऑक्सीजन के सिलिंडर कहीं वजन न बढ़ा दें, इस कारण वे अपने ऑक्सीजन नहीं ले गए थे।
(यह यात्रा वृत्तांत दोनों पायलटों से बातचीत पर आधारित है।)