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कोचिंग संस्थाओं के लिए बनेंगे नियम

भोपाल. coach प्राइवेट कोचिंग संस्थाओं की बेलगाम फीस पर सरकार नियंत्रण करने जा रही है। स्कूल शिक्षा विभाग फिलहाल इस बात का परीक्षण कर रहा है कि इन संस्थाओं में कितनी फीस वसूली जा रही है तथा वहां मिलने वाली सुविधाओं की क्या स्थिति है। आगामी तीन से चार महीने में इस बारे में नियम तैयार होने की संभावना है।

राजधानी सहित प्रदेश के अनेक निजी कोचिंग संस्थानों में भारी-भरकम फीस की वसूली तथा सुविधाओं की कमी की शिकायतें सामने आती रही हैं। चूंकि शिक्षा विभाग के पास इस संबंध में कोई अधिकार नहीं था, इसलिए शिकायतों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी।

हाल में यह मामला जब स्कूल शिक्षा मंत्री लक्ष्मणसिंह गौड़ के सामने लाया गया, तो उन्होंने कोचिंग संस्थानों की फीस और सुविधाओं की जानकारी जुटाने के आदेश दिए। इसके बाद शिक्षा विभाग इन संस्थानों में पढ़ाने वाले शिक्षकों की योग्यता और संस्थानों द्वारा किए जाने वाले दावों का भी परीक्षण कर रहा है।

वैसे कुछ अधिकारी यह भी मानते हैं कि बड़े कोचिंग संस्थानों में सीडी और एलसीडी प्रोजेक्टर के माध्यम से पढ़ाई कराई जाती है। ऐसा नहीं है कि हर कोचिंग क्लास में बच्चों और अभिभावकों को ठगा जा रहा है। इनमें एक कक्षा में अधिकतम 60 बच्चे मौजूद होते हैं। विद्यार्थियों की शंकाओं का समाधान करने के लिए विशेष कक्षाएं भी लगाई जाती हैं।

दो साल की फीस एक लाख रुपए
राजधानी में आईआईटी की कोचिंग क्लासेस में दो साल के कोर्स की फीस अधिकतम एक लाख रुपए तक है। इन कोचिंग संचालकों ने कुछ निजी हॉस्टल संचालकों से अनुबंध कर लिया है और प्रति माह ढाई हजार रुपए के अतिरिक्त खर्च पर यह सुविधा भी देते हैं। शहर के बड़े माने जाने वाले करीब आधा दर्जन कोचिंग संस्थानों में लगभग पांच हजार विद्यार्थी पढ़ रहे हैं।

क्या कहते हैं कोचिंग संस्थान संचालक
>> सरकार फीस तो निर्धारित नहीं कर सकती। सुविधाओं का पैमाना जरूर तय करना चाहिए। इससे अच्छे संस्थानों और विद्यार्थियों दोनों का लाभ होगा।
आलोक गुप्ता, कोचिंग संचालक

>> सरकार यदि सकारात्मक दृष्टिकोण से कुछ कदम उठाती है, तो हम उसका स्वागत करेंगे। अच्छे इंस्टीट्यूट तो बेहतर सुविधाएं दे रहे हैं. तभी छात्र आते हैं।
रमेश पणिकर

>> सरकार के इस कदम से मशरूम की तरह उगने वाले कोचिंग संस्थानों पर प्रतिबंध लगेगा।
-वीके पाठक

>> फीस सरकार तय नहीं कर सकती। कोई भी कोचिंग संस्थान बेहिसाब फीस वसूल कर बाजार में टिक नहीं सकता।
संजय तिवारी

इनका कहना है
>> मैंने कोचिंग क्लास की सुविधाएं और फीस का परीक्षण करने के आदेश दिए हैं। रिपोर्ट आने के बाद हम विचार करेंगे कि क्या किया जा सकता है? नए नियम बनने में तीन से चार महीने का समय लगने की संभावना है।
-लक्ष्मणसिंह गौड़, स्कूल शिक्षा मंत्री

क्या हैं शिकायतें
छोटे- छोटे कमरों में सौ से डेढ़ सौ बच्चे एक साथ बैठते हैं।
फीस का कोई पैमाना नहीं
फर्जी और मिलते- जुलते नामों से छात्रों को भ्रमित करते हैं
कोर्स अधूरा छोड़ कर कोचिंग बंद कर देते हैं





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