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ई-चरखा इन्वर्टर की तरह काम करेगा

इंदौर. bapu बापू का परंपरागत चरखा भी समय के साथ बदलकर ई-चरखा होने की तैयारी में है। यह कताई के साथ संगीत सुनाएगा और बिजली गुल होने पर इन्वर्टर की तरह काम करेगा। इसका अविष्कार किया है बेंगलुरू के इंजीनियर आर.एस. हीरेमठ ने।

खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग 19 नवंबर को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की जयंती पर राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील दिल्ली में लोकार्पण कराएगा। चरखे का मुंबई में सफल परीक्षण भी किया जा चुका है।

कैसे काम करेगा
इस चरखे में नीचे लेड एसिड बैटरी लगी होगी जो रखरखाव से मुक्त होगी और इन्वर्टर का काम करेगी। चरखे से दो घंटे की कताई में इतनी ऊर्जा पैदा होगी कि घर 6-7 घंटे रोशन किया जा सके। साथ में रेडियो भी सुना जा सके।

पहली बार में 2 लाख चरखे
आयोग ने देशभर के खादी बुनाई केंद्रों पर दो लाख ई-चरखे लगाने की योजना बनाई है। कीमत तीन हजार रुपए है।

बुनकर ने भी माना उपयोगी
बुनकर संघ, इंदौर के अध्यक्ष अब्दुल रब का कहना है चरखे की क्षमता का अंदाजा तो देखने और काम करने से ही लगाया जा सकेगा। पॉवरलूम से पहले स्पीनिंग में चरखे का उपयोग आज भी होता है। इससे खादी के साथ बुनकरों को भी फायदा होगा।





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