HomeNewsMetrosJaipur Jaipur

निजी विश्वविद्यालयों की रेल, जमीनों का खेल

जयपुर. प्रदेश में निजी विश्वविद्यालय अधिनियम रद्द हो गया है, लेकिन इसके तहत आवंटित करोड़ों की जमीन जस की तस रखी गई है। सवाल यह है कि जब मूल कानून ही रद्द हो गया तो जमीन का आवंटन निरस्त क्यों नहीं किया गया।

सरकार अब इस अधिनियम की जगह हर निजी विश्वविद्यालय के लिए अलग अध्यादेश लाने की तैयारी कर रही है। इसमें भी पुराने कानून के तहत हुए कामों को यथावत रखा जा रहा है। सरकार के पास 20 से अधिक प्राइवेट विवि के प्रस्ताव विचाराधीन हैं।

किसे कितनी जमीन :
केशव विद्यापीठ को जामडोली व सुमेल में 172 बीघा, महिमा शिक्षा समिति को गोविंदपुरा में 37 बीघा और भवाई गढ़ का बंधा में 52 बीघा जमीन दी जा रही है। इन जमीनों की बाजार दर 80 लाख से एक करोड़ रुपए प्रतिबीघा तक बताई जाती है।

अधिनियम क्यों हुआ निरस्त :
अधिनियम के तहत संस्थाओं को जमीन आवंटन सस्ती दर पर होता, लेकिन कभी विश्वविद्यालय बंद किया जाता तो जमीन सरकार में निहित न होकर प्रबंधकों के हाथों में चली जाती।

इस तरह की कई आपत्तियां दर्ज कराते हुए राजस्थान विवि शिक्षक संघ के नेता प्रकाश चतुर्वेदी इसे सुप्रीम कोर्ट तक ले गए थे। इस बीच विधानसभा के मानसून सत्र में इस अधिनियम को निरस्त कर दिया गया।

क्या हैं सवाल?
-कानून निरस्त हो गया तो इसके तहत आने वाली सारी प्रक्रिया निरस्त क्यों नहीं की गई?
-निरस्त कानून की जगह नया कानून बनाने के बजाय अध्यादेश क्यों लाया जा रहा है?
-सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश याचिका की आपत्तियों को दरकिनार क्यों किया गया?
-जब विधानसभा में पारित कानून पर ही इतना विवाद हुआ तो अध्यादेश लाने का जोखिम क्यों उठाया जा रहा है?

इनका कहना है
>> जमीन आबंटन की प्रक्रिया का प्राइवेट यूनिवर्सिटी एक्ट से कोई संबंध नहीं है। यह प्रक्रिया राजस्व विभाग के नियमों के तहत पूरी की गई थी। इसलिए जमीनों का आबंटन निरस्त करने की मांग का कोई अर्थ नहीं है।
-ए.के. गर्ग, उच्च शिक्षा के प्रमुख सचिव

>> निजी विश्वविद्यालय कानून के तहत अब तक की गई पूरी प्रक्रिया को यथावत रखा जा रहा है। ये चीजें नए कानून की प्रस्तावना में शामिल की जा रही हैं। इसमें जमीनों का आवंटन भी शामिल है।
-महेश भगवती, विधि सचिव

>> सरकार नियमों की धज्जियां उड़ा रही है। हमने सरकार के अधिनियम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सरकार को अध्यादेश के मामले में भी कानून से खिलवाड़ नहीं करने देंगे।
-प्रकाश चतुर्वेदी, निजी विश्वविद्यालय अधिनियम को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ता

>> जब कानून ही निरस्त हो गया तो उसके तहत हुई समूची कार्यवाही भी निरस्त हो जानी चाहिए और भूआबंटन भी रद्द हो जाना चाहिए। सरकार जब नया कानून लाएगी, तब देखा जाएगा कि भूमि आबंटन होना चाहिए या नहीं।
-संयम लोढ़ा, निजी विश्वविद्यालय विवाद को विधानसभा में कई बार उठाने वाले कांग्रेस विधायक

तो बदला क्या?

विधानसभा में निजी विश्वविद्यालय अधिनियम रद्द हो गया। सरकार अब अध्यादेश ला रही है। इसमें सारी चीजें अधिनियम की हैं, तो बदला क्या?

यही है असली मामला
अधिनियम रद्द होते ही जमीन का आवंटन रद्द हो जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। करोड़ों की जमीन निजी विश्वविद्यालयों के नाम है।

आपत्तियां ज्यों की त्यों
निजी विश्वविद्यालयों को सस्ती दर पर जमीन मिलती। यदि विवि कभी बंद कर दिया जाता तो सरकार का जमीन पर कोई हक नहीं रहता। ऐसी कई आपत्तियां ज्यों की त्यों हैं।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड:
 

आपके विचार
Dr. Raj Khare
Tuesday, 9th Oct 2007, 1:37
All the alloted lands must be surrendered to Govt, as the private university Act has been abolished