अमृतसर.
गुरुओं की इस पावन धरती पर आज हमें कदम रखे एक साल हो गया है। इस एक साल में भास्कर का सफर काफी चुनौतीपूर्ण और रोमांचक रहा। आज भी यह शहर हमें उतना ही नया लगता है, जितना कि पहले दिन लगता था। एक छोटे से पड़ाव से शुरू हुआ सफर अब आसमां की बुलंदियों को चूम रहा है। लक्ष्य केंद्रित सिटी भास्कर के जरिए हमने शहर के एक ऐसे समृद्ध पाठक वर्ग को अपने साथ जोड़ा, जिसे अब तक सभी ने दरकिनार कर रखा था। यह वर्ग है, यूथ, विमन और सीनियर सिटीजंस का। भास्कर ने इस एक साल के अंतराल में ही इन सभी को अपने साथ जोड़ लिया। सिटी भास्कर का अपने पाठकों के प्रति विजन और मिशन दोनों ही स्पष्ट हैं।
विकास : प्रोफेशनलिज्म और ब्रांडिंग का है जमाना, तो शहर को भी इसकी जरूरत पड़ेगी। गत एक साल में शहर के विकास पर 3150 करोड़ खर्च करने का प्रावधान रखा गया। इसके तहत शहर को अगले साल तक एलिवेटिड रोड मिलेगी। वहीं शहर के वार्डो का दायरा बढ़ाकर भी ६५ तक कर दिया गया। २५ साल पहले कभी यहां सिटी बसें चला करती थीं, जो इस साल नवंबर तक फिर सड़कों पर दौड़ना शुरू हो जाएंगी। यहां पर रोजाना पांच लाख का फ्लावर का बिजनेस होता है। इसके साथ ही शहर बड़े मेडिकल हब के रूप में उभर रहा है। यहां के कई डाक्टर्स विदेशों तक प्रसिद्ध हैं। विदेशों से भी मरीज शहर में अपना इलाज करवाने आते हैं।
चुनौतियां : अभी तक 65 फीसदी लोग ही वाटर सप्लाई के दायरे में आ सके हैं। कनेक्टिविटी में एयरपोर्ट ग्लोबल तौर पर तो काफी डेवलप है, लेकिन लोकल कनेक्टिविटी में आज भी पिछड़ा हुआ है। अस्पतालों के आसपास काफी ध्वनि प्रदूषण होता है। इन्हें साइलेंस जोन में लाए जाने की जरूरत है। इसके अलावा यहां के पानी में आयरन, क्लोराइड और सल्फेट की मात्रा तय मानकों से ज्यादा मिली है, जो कि बिलकुल सुरक्षित नहीं है। लोगों की जरा सी चूक से रोजाना दस करोड़ लीटर पानी बर्बाद होता है। ब्रस्ट सीवरेज तकनीक के जरिए वाटर सप्लाई सिस्टम मंे बदलाव लाने की बात हुई थी, जो आज भी जस की तस है। ट्रैफिक दिनोंदिन बढ़ रहा है, लेकिन सड़कों को चौड़ा करने की गुंजाइश बहुत कम है। ऐसे में ट्रैफिक को व्यवस्थित करना भी बड़ी चुनौती है।
भविष्य का शहर : इंश्योरेंस सेक्टर में करीब 25 हजार नौकरियां मिलेंगी। यही नहीं कंपनियों ने पासआउट की स्किल भी घटा दी है। मल्टीनेशनल कंपनीज के पदार्पण के साथ ही रिटेल सेक्टर में भी 8400 नए जॉब्स सामने होंगे। अगले पांच साल में 40 माल और १५ फाइव स्टार होटल दिखेंगे, जिसमें ३क् फीसदी काम पूरा हो चुका है। शहर को सालिड बेस्ट प्लांट मिलेगा। इसके अलावा अब शहर की विकास की दिशा वर्टिकली दिखने लगी है, क्योंकि शहर की अधिकतर इमारतें अब वर्टिकली बनने लगी हैं। पुराने शहर के अलावा भी नया अमृतसर विकसित हो रहा है।
हॉस्पिटेलिटी व एजूकेशन सेक्टर में कई नई संभावनाएं उभर रही हैं। वहीं शहर आगे से कहीं ज्यादा हरा-भरा दिखेगा, इसके लिए दो करोड़ रुपए की ग्रांट भी मुहैया कराई गई है। आने वाले दिनांे में शहर की गलियां, सड़कें और मौहल्ले साफ-सुथरे दिखेंगे। शहर कुछ ऐसा होगा, जिसमें यहां पर मेट्रो, ट्राम, सीएनजी ट्रांसपोर्ट सिस्टम, आरओबी, बेहतर रेलवे स्टेशन दिखेगा। इंटरनेशनल एयरपोर्ट राजासांसी में भी कई सुधार हो रहे हैं। जल्द ही यहां जंबो जेट भी लैंड कर सकेंगे। इसके लिए जमीन तैयार की जा रही है।
अंत में शिवमंगल सिंह सुमन की कविता की ये चंद पंक्तियां याद आती हैं: जिस जिससे पथ पर स्नेह मिला
उस उस राही का धन्यवाद।
जीवन अस्थिर अनजाने ही
हो जाता पथ पर मेल कहीं
सीमित पग-डग, लंबी मंजिल
तय कर लेना कुछ खेल नहीं
दाएं-बाएं सुख-दुख चलते
सम्मुख चलता पथ का प्रमाद
जो साथ न मेरा दे पाए
उनसे कब सूनी हुई डगर
मैं भी न चलूं यदि तो भी क्या
राही मर लेकिन राह अमर
इस पथ पर वे ही चलते हैं
जो चलने का पा गए स्वाद
आभारी हूं मैं उन सबका
दे गए व्यथा का जो प्रसाद
जिस जिससे पथ पर स्नेह मिला
उस उस राही का धन्यवाद।