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आटा निर्यात की खबरों से गेहूं में नरमी के संकेत

wheatनई दिल्ली: अभी गेहूं स्थिर बना हुआ है और गेहूं के आटे पर आयात शुल्क में कटौती करने की खबरों के बाद गेहू में नरमी के संकेत मिले हैं। सोयाबीन की फसल आने लगी है और स्टाकिस्टों ने गेहूं निकालकर सोयाबीन का रुख करना शुरू कर दिया है।

कृषि मंत्रालय मंत्रियों के समूह के करीब 8, 000 करोड़ रुपए मूल्य के 4.5 लाख टन गेहूं आटा के आयात पर फैसले का इंतजार कर रहा है। सरकार ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी तो इसका असर घरेलू बाजार में गेहूं की कीमतों पर पड़ेगा। मिलर ने भी गेहूं की खरीद घटा दी है। आयातित गेहूं की पहली खेप भारत के मुंदरा पोर्ट पर आ गई है। मंत्रियों के समूह ने वित्त वर्ष की समाप्ति से पहले ही 10 लाख टन गेहूं आयात की अनुमति दे दी है। पंजाब में रबी के गेहूं की बुवाई शुरू हो गई है। यहां से पिछले साल की तरह 145 लाख टन गेहूं उत्पादन की संभावना है।





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Raju Titus
Tuesday, 9th Oct 2007, 12:29
Import of wheat flour is not good for farmers.It will reduce wheat prize will direct effect farmers.Growing wheat is very expensive due to cost of Diesel ,urea,electricity, insecticide and weedicide etc. Second what is the suerity of the quality.No body knows what is mixed in the flour,how this grain grown how much harmful chemicals in it.