हिन्दी मास अश्विन के शुक्ल पक्ष के आठवें दिन अष्टमी की पूजा की जाती है। इस दिन मां दुर्गा की पूजा पूरे विधि विधान और उत्साह के साथ भारत के कई प्रांतों में की जाती है जिसमें बंगाल, बिहार, उड़ीसा, असम, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश प्रमुख हैं। इस दिन को महाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है।
मान्यता है कि अष्टमी और नवमी के बदलाव वाले समय में मां दुर्गा अपनी शक्तियों को प्रकट करती हैं। इसलिए इस दिन एक विशेष प्रकार की पूजा की जाती है जिसे चामुंडा की सांध्यपूजा के नाम से जाना जाता है।
महाष्टमी के दिन सुबह स्नान करने के बाद व्यक्ति को देवी भगवती की पूरे विधि विधान से पूजा करनी चाहिए। माता की प्रतिमा अच्छे वस्त्रों से सुसज्जित रहनी चाहिए, प्रतिमा को सारे पारंपरिक हथियारों से लैस रहना चाहिए जैसे उनके सिर पर जो छत्र होता है उस पर एक चांदी या सोने की छतरी होनी चाहिए।
यह चिह्न राजशाही का प्रतीक है। साथ में एक चौरी होती है जो पंखे की तरह का एक ब्रश होता है। अगर इस दिन ग्रहों की स्थिति भद्रवती नक्षत्र में पड़ती है तो सारे विधि विधानों को शाम में करना चाहिए और पशु की बलि मध्य रात्रि में देनी चाहिए।